Sunday, September 20, 2026
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भूविस्थापितों को बेजा कब्जा के नाम से मिला नोटिस, बढ़ा आक्रोश, एसईसीएल के अधिकारियों का पुतला दहन आज

कोरबा (खटपट न्यूज)। एसईसीएल गेवरा परियोजना के लिए वर्ष 1980 में घाट मुड़ा ग्राम की सैकड़ो एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया था और वहां के 75 भुविस्थापित परिवारों को पुनर्वास ग्राम गंगानगर में बसाया गया था । ग्रामीणों के मुताबिक 25 एकड़ क्षेत्र को केवल घाटमुड़ा के बसाहट के लिए दिया गया था जिससे वह गाँव अपने मूल स्वरूप में पुन: बसा रहे किन्तु अब दूसरे जगह के विस्थापितों के लिए जमीन की आवश्यकता पड़ने पर काबिज लोंगो की बाड़ी,बाउंड्री एवं साग सब्जी उगा कर जीवन यापन के जगह को बेजा कब्जा बोल कर नोटिस भेज रहे हैं। उनकी पूरी जमापूंजी घर बनाने और सवारने में लग चुका है जिसपर पहले भी बुलडोजर चलाकर चकनाचूर कर दिया गया था जिसका मुआवजा आज तक नहीं मिला है ।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव प्रशांत झा ने कहा की घाटमुड़ा गंगानगर के विस्थापित परिवार जिन्होंने विकास के नाम पर हजारों एकड़ जमीन दिया जिन्हें 25 एकड़ जमीन बसने के लिए दिया गया था जिस पर वह 33 वर्षों से बसे हैं पहली बार इस तरह का बेजा कब्जा के नाम से नोटिस देना पुर्नवास के नाम पर उनके साथ क्रूर मजाक है और विस्थापित परिवार से जमीन के बदले धोका देने जैसा है । मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की पार्षद राजकुमारी ने कहा की नोटिस के विरोध में उग्र आंदोलन की घोषणा कल गंगानगर में पुतला दहन के समय किया जायेगा इस बार याचना नहीं संघर्ष होगा और बहुत हुआ विस्थापन अब एसईसीएल बेदखल करके दिखाए विकास के नाम पर हजारों एकड़ जमीन ली गई और बसाहट गांव के विस्थापित परिवारों को बेजा कब्जाधारी बताना विस्थापितों का मजाक उड़ाने जैसा है आज भी गंगानगर के विस्थापित परिवार बुनियादीसुविधा स्वास्थ्य, बिजली, पानी,स्कूल,मनोरंजन के साधन, समशान घाट,गौठान आदि सुविधाओं से वंचित हैं। माकपा ने ग्रामीणों के साथ बैठक कर आंदोलन की रूपरेखा बनाई है। कल पुतला दहन में माकपा के दोनों पार्षद राजकुमारी कंवर,सुरती कुलदीप माकपा, किसान सभा जनवादी महिला समिति के साथ हजारों की संख्या में भू विस्थापित रहेंगे और आगे आंदोलन की रूप रेखा का ऐलान करेंगे

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