Friday, March 27, 2026
Home कोरबा बंद रेतघाट प्रारंभ कराने दिलचस्पी नहीं, रेत के फेर में उलझे निर्माण

बंद रेतघाट प्रारंभ कराने दिलचस्पी नहीं, रेत के फेर में उलझे निर्माण


इधर, खदान बंद तो ठेकेदार के पास रेत का अकूत भंडार कैसे?

सड़क निर्माण के लिए रेत का भंडार

कोरबा, (खटपट न्यूज)। जिले में वैध रेत की किल्लत लगातार बनी हुई है और इसके मध्य अवैध खनन एवं परिवहन के जरिए महंगे दाम पर रेत की आपूर्ति संबंधित निर्माणकर्ताओं को कराई जाती रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सख्त निर्देश के बाद प्रशासन और पुलिस ने कार्यवाही तो शुरू करा दी है लेकिन बंद पड़े वैध रेतघाट प्रारंभ कराने प्रशासन और खनिज विभाग दिलचस्पी नहीं दिखा रहा। लोगों की मांग है कि वैध घाटों का संचालन सुचारू रुप से प्रारंभ कराया जाए और फिर जो अवैध खनन कर रहे हैं, उन पर सख्ती बरती जाए। 300 रुपए की रेत की आड़ में हजारों रुपए कमाने की मंशा रखने वालों के द्वारा राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव के बूते लोगों को कहीं न कहीं आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है। मकान सहित अन्य निर्माण में लगे लोगों की समस्या अवैध खननकर्ताओं और प्रशासन की सख्ती के बाद बढ़ गई है। इनकी अपेक्षा है कि जिला प्रशासन बंद घाटों को जल्द से जल्द प्रारंभ कराकर राहत प्रदान करे क्योंकि माध्यम वर्ग के लोग कुछ ज्यादा ही पिस रहे हैं।

इधर दूसरी ओर रिसदी से रजगामार के मध्य सड़क बनाने के लिए एसईसीएल रजगामार के ठेकेदार को इतना रेत कहां प्राप्त हुआ है? उक्त कार्य के लिए सैकड़ों ट्रेक्टर रेत का भंडारण करके रखा गया है। एक ओर जिला प्रशासन का कहना है कि अवैध सामग्रियों का उपयोग किसी भी तरह के निर्माण कार्य में न किया जाए और दूसरी ओर जब बारिश के मौसम में एनजीटी के निर्देशानुसार 15 अक्टूबर तक सभी रेतघात बंद रहे और इसके बाद भी प्रमुख रेतघाट खोले नहीं जा सके हैं, तब उक्त ठेकेदार के निर्माण स्थल पर इतने बड़े पैमाने पर रेत का भंडारण कई सवाल उठा रहा है। स्थानीय लोगों ने सवाल किया है कि जब रेत खदान बंद है तो यहां इतने बड़े पैमाने पर लाई गई रेत क्या वैध है? जिला प्रशासन व खनिज विभाग को इसकी जांच करनी चाहिए। अन्य निर्माण के भंडारण स्थल की भी जांच जरूरी है।
0 पुलिस की भूमिका पर लोगों का सवाल
रेत का अवैध खनन व परिवहन के मामले में की जाने वाली धरपकड़ की कार्यवाही में पुलिस की भूमिका पर लोगों ने सवाल खड़े किए हैं। आम लोगों सहित सुलझे हुए जन प्रतिनिधियों का मानना है कि रेत सहित अन्य खनिज पदार्थों की धरपकड़ के लिए प्रशासनिक तौर पर पृथक से खनिज विभाग है। इस विभाग का एकमात्र काम ही खनिज संबंधी नियमों का पालन कराना व उल्लंघन पर कार्यवाही करना है। विभाग अपने कर्तव्य के मामले में अज्ञात कारणों से अपेक्षाकृत गंभीरता तो नहीं दिखा रहा लेकिन पुलिस को अपना मूल काम करते हुए रेत के वाहनों को भी पकड़ना है। रेत का वैध और अवैध होना, रायल्टी पर्ची सहित अन्य नियमों की जानकारी विशेष तौर पर खनिज अमले को होती है जबकि पुलिस का इस तरह के मामलों से न तो कोई वास्ता रहा है और न ही उनके प्रशिक्षण में रेत पकड़ना शामिल है। इतना ही नहीं परिवहन के दौरान पकड़े जाने पर कार्यवाही ट्रैक्टर के चालक पर ही होती है जबकि वह परिवहन का माध्यम मात्र है। किसकी अवैध रेत कहां से ला रहा है, इस पर जांच नहीं होती। रेत चोरों/तस्करों पर चोरी का अपराध दर्ज करने में भी तकनीकी दिक्कतें हैं।कानून व्यवस्था बनाने के लिए कार्यवाही स्थल पर पुलिस का सहयोग लेना-देना अलग बात है।
0 खनिज टॉस्क फोर्स की सक्रियता?

छत्तीसगढ़ शासन के खनिज साधन विभाग द्वारा 28 जनवरी को एक पत्र कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक के नाम जारी किया गया। खनिज रेत के अवैध खनन, परिवहन, भंडारण पर कुछ जिलों में प्रभावी कार्यवाही का अभाव देखने की बात कही गई है। इसे रोकना कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक की प्रशासनिक जिम्मेदारी बताया गया है। जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में खनिज टॉस्क फोर्स और इसके अंतर्गत खनिज अधिकारी द्वारा खनिज उड़नदस्ता एवं अंतरविभागीय संयुक्त उड़नदस्ता दल के माध्यम से खनिजों के अवैध कार्यों पर प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने कहा गया है। इस मामले में कलेक्टर व एसपी के निर्देश पर कार्यवाही तो हो रही है लेकिन टॉस्क फोर्स की सक्रियता पिछले कई महीनों से शून्य ही है। न सिर्फ रेत बल्कि राजस्व और वन भूमि से बेधड़क होकर मुरुम का अवैध खनन कर सरकारी निर्माण में उपयोग हो रहा है। अन्य खनिज संसाधनों का भी अवैध दोहन किया जा रहा है, किन्तु इस पर कोई निगरानी उड़नदस्ता दल की नहीं है।

00 सत्या पाल 00 (7999281136)

Advertisement Carousel