0 आरोपों से घिरे सहायक संचालक को नहीं हटाने पर शिक्षक नेताओं ने जताई हैरानी

कोरबा(खटपट न्यूज़)। जिला शिक्षा विभाग के द्वारा पदोन्नत प्रधान पाठकों की पदस्थापना के लिए काउंसिलिंग की कड़ी में 27 अप्रैल को भी विद्युत गृह स्कूल में पदस्थापना से शेष रह गए प्रधान पाठकों की काउंसलिंग की गई। इस काउंसलिंग में काउंसलिंग समिति के अध्यक्ष व जिला शिक्षा अधिकारी जीपी भारद्वाज उपस्थित नहीं थे। उनकी अनुपस्थिति में विवादास्पद सहायक संचालक के आर डहरिया, बीईओ संदीप पांडेय व अन्य ने काउंसलिंग की। यहां वांछित दस्तावेजों के साथ पहुंचे पदोन्नत प्रधान पाठकों ने नियम के तहत पदस्थापना की मांग रखी। काउंसिलिंग के दौरान पूरे समय नोक-झोंक होती रही। इस दौरान 2 पदोन्नत प्रधान पाठकों ने इस बात पर लिखित आपत्ति दर्ज कराते हुए शिकायत किया है कि उनके पदांकन में वरियता क्रम का ध्यान नहीं रखा गया है। डीपीआई के निर्देशों और उच्च न्यायालय द्वारा जारी किए गए आदेश तथा शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक द्वारा दी गई गाइडलाइन का पालन न करते हुए वरीयता क्रम को दरकिनार किया गया है। उनसे जूनियर लोगों को उनके स्थान पर पदस्थापना दी गई है जबकि वरिष्ठ प्रधान पाठक को पदस्थ करना है। संकुल और विद्यालयों में पद रिक्त होने के बाद भी वरियता क्रम का पालन नहीं किए जाने और पदांकन में मनमानी का आरोप लगता रहा। काउंसिलिंग समिति में शामिल सहायक संचालक केआर डहरिया को हटाए जाने की मांग दोहराई गई। उन पर लगातार लगते मनमानी के आरोपों के बीच काउंसिलिंग में उनकी भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। शिक्षक नेताओं ने इस बात पर हैरानी जताई है कि सहायक संचालक पर लगातार लगते आरोपों के बाद भी उन्हें काउंसलिंग समिति में आखिर शामिल क्यों किया गया है? इस बारे में जब उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी से पूर्व में चर्चा की थी तब उनका कहना था कि श्री डहरिया के विरुद्ध शिकायत हुई है किंतु आरोप तय नहीं हुआ है और बिना दोषी पाए उन्हें हटाया जाना संभव नहीं। शिक्षक नेताओं का कहना है कि विवादास्पद लोगों को समिति में शामिल किए जाने से पूरी प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में आ गई है और पारदर्शिता का पूरी तरह से अभाव काउंसलिंग व पदांकन में बना हुआ है। हालांकि इस पूरे प्रकरण में वह लोग काफी खुश हैं जिन्हें मनचाहे स्थान पर पदस्थापना मिली है और जो नियमों का पालन कराने के साथ वरीयता क्रम और नियम के आधार पर पदस्थापना की मांग कर रहे हैं उनमें इसका उल्लंघन किए जाने से नाराजगी देखी जा रही है।















