धान छत्तीसगढ़ की आत्मा-किसान का जीवन है, छत्तीसगढ़ में किसान आत्महत्या को मजबूर, स्थिति दुर्भाग्यजनक : बृजमोहन

0 कहा- अधिकारी मनमनी करते है, मंत्रीमंडल उपसमिति की बात नही मानते
0 13 सौ करोड़ का धान सड़ा
0 समय पर बारदाना खरीदी क्यों नही की?
0 मृतक किसान के परिवार को 25 लाख का मुआवजा दे सरकार
रायपुर(खटपट न्यूज़)। भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने आज स्थगन प्रस्ताव की ग्रहता पर चर्चा करते हुए सरकार पर तीखे आरोप लगाए है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ मंे किसान अपने परिवार के 4 लोगों को मारकर स्वयं आत्महत्या क्यों कर लेता है? छत्तीसगढ़ के पाटन में 4-4 लोगों की हत्या क्यों हो जाती है? सभापति महोदय, मुझे लगता है कि हमें गंभीरता के साथ जांच करवानी चाहिए। माननीय गृह मंत्री जी भी यहां पर बैठे हैं, इस बात का सर्वे कराना चाहिए, इसका निदान कराना चाहिए कि आखिर किसान को आत्महत्या के लिए क्यों मजबूर होना पड़ता है?

श्री अग्रवाल ने कहा कि यह बड़ी दुर्भाग्यजनक स्थिति है। प्रकाश तारक की मानसिक स्थिति खराब थी, उसका ईलाज चल रहा था। आप जरा बताईये कि उसका कहां ईलाज चल रहा था? आपके पास कोई प्रिसस्क्रप्सन है? पुलिस कुछ भी कह देगी? कम से कम मृतकों के प्रति हमारी संवेदना होनी चाहिए। मैं समाचार-पत्रों में पढ़ता हूँ कि मृतक की पत्नि का गलत चाल-चलन था। यह कोई छपने की चीज है। सरकार को शर्म आनी चाहिए। कम से कम मृतक के बारे में इस प्रकार की बातें न कहे। मृतकों के बारे में इस प्रकार की दुर्भाग्यजनक बातें…।
श्री अग्रवाल ने कहा कि उनके बच्चों की क्या हालत होगी? वे बच्चें कहीं मुह दिखा पायेंगे कि वे उस मां के सुपुत्र हैं? यह नियम है कि लड़कियों का नाम, महिलाओं का नाम प्रकाशित नहीं किया जाता है। आप नाम प्रकाशित कर रहे हैं। परन्तु उसके साथ उनके बारे मंे भी जानकारी दे रहे हैं। एक बार इस बात का अध्ययन करवा लीजिये। आपने सदन में जवाब दिया, हमें उसमें कोई आपत्ति नहीं है। परन्तु आप अध्ययन करवा लें। माननीय खाद्य मंत्री जी, आपकी गलती नहीं है। आपके अधिकारी एक महीने तक डी.ओ. जारी नहीं किया इसलिए 13 करोड़ का धान सड़ रहा है। आपकी जानकारी में भी नहीं है। हो सकता है कि आपका निर्देश नहीं मान रहे हो। क्यों 13 सौ करोड़ रूपये का धान सड़ा? आप भी जानते हैं कि जो कुछ नहीं है, अधिकारी मनमानी करते हैं, आपके मंत्रिमण्डल की उप समिति की रिपोर्ट को भी लागू नहीं करते हैं। समय पर बारदाने की खरीदी क्यों नहीं की? किसकी गलती है? पहले क्यों आर्डर नहीं दिया? मैं भी कृषि मंत्री रहा हूँ। मुझे भी जानकारी है कि पहले साल के खरीदी के समय ही दूसरे साल के लिए बारदाना खरीदने की तैयारी हो जाती है। अगर कोई अव्यवस्था होती है तो उसको सुधारा जाता है। परन्तु आपके पास वह व्यवस्था नहीं है। परन्तु आपके पास व्यवस्था नहीं है। देखिए, गलतियों को सुधारेंगे तब छत्तीसगढ़ के किसानों की ठीक तरह से सेवा कर पायेंगे। आप गलतियों को छिपाने की कोशिश मत करिये। श्री अग्रवाल ने कहा कि केन्द्र सरकार के बिहाॅफ में आप धान खरीदते हैं। हर चीज के लिए केन्द्र सरकार। बारदाने की जिम्मेदारी किसकी है? केन्द्र की नहीं है, यह राज्य की जिम्मेदारी है। केन्द्र सरकार आपको सहयोग करती है।जूट कमिश्नर आपको बारदाने की स्पलाई करे यह उसकी जिम्मेदारी नहीं है। बारदाना कहां से खरीदना है यह सरकार को तय करना है कि वह बाजार से खरीदेगी या किसानों से खरीदेगी या राईसमिलर्स से खरीदेगी या राशन दुकान से खरीदेगी या जूट कमिश्नर से खरीदेगी या प्रायवेट प्रोडक्सन वालों से खरीदेगी। यह आपकी जिम्मेदारी है। मुझे मालूम है, आप गुमराह मत करो।
श्री अग्रवाल ने कहा कि मुझे आदेश बता दो कि कहां आवश्यक है कि आप जूट कमिश्नर से खरीदेंगे। आप किसी से भी बारदाना खरीद सकते हैं। बारदाने की व्यवस्था की जिम्मेदारी आपकी है। समाचार पत्रों में छपवाने के लिए ठीक है कि जूट कमिश्नर हमको बारदाना नहीं दे रहा है। कम से कम सदन मंे तो असत्य मत बोलिए। बारदाने की जिम्मेदारी आपकी है और अगर बारदाना सोसायटियों मंे नहीं है तो उसके लिए आप जिम्मेदार हैं, आपकी सरकार जिम्मेदार है। किसान जिम्मेदार नहीं है। उसके लिए दूसरा कोई जिम्मेदार नहीं है।
धान पूरे छत्तीसगढ़ की आत्मा है। धान छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था है। धान छत्तीसगढ़ के किसान का जीवन है। अगर इसको हम ठीक कर लेंगे हमारे समय भी 15 सालों तक हमने धान खरीदा है। गिरदावली बरसात में होती है। क्यों उसने गिरदावली करने का आदेश दिया? क्यों आपने निकाला? क्यों हमारे कोंडागांव के किसान को आत्महत्या करनी पड़ी? आपने क्यों तहसीलदार को सस्पेंड किया।? इन सब बातों का जवाब नहीं आ रहा है इसलिए आपको इस स्थगन को स्वीकर करना चाहिए।
श्री अग्रवाल ने कहा कि हम तो चाहते थे, मैंने शुरूआत मंे ही कहा कि ये दुर्भाग्यजन है कि चार विभागों से जुड़ा हुआ विषय है और एक विभाग की सेक्रेटरी बेठी हैं और वह भी लेट आई हैं और बाकी विभागों के अधिकारी उपस्थित नहीं है यह सरकार की क्या दशा है? इस सरकार की क्या दिशा है? इस सरकार का कोई वजूद है? यह आपके सम्मान का सवाल है। आप उधर देखें कि इस विधानसभा का इतना अपमान कि छत्तीसगढ़ की आत्मा की जब बात हो रही है तब कोई अधिकारी उपस्थित नहीं।
श्री अग्रवाल ने कहा कि यहां पर किसानों ने आत्महत्या की है जरा आप उसको मजाक में मत लीजिए। चाहे वह हमारे समय हुई हो या आपके समय हुई हो। हमको इसकी चिंता करने की जरूरत है स्वाभावित आत्महत्या तो समझ में आती है, परन्तु आत्महत्या खेती किसानी के कारण कीटनाशन के कारण, गिरदावली के कारण अगर कोई आत्महत्या करता है तो यह गंभीर मामला है और इसके ऊपर मंे आपको ध्यान देने की जरूरत है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि किसानों की मृत्यू हुई है उसमें 35, 40, 50 साल के बहुत कम उम्र के लोग भी हैं उनके परिवार, बच्चे छोटे-छोटे हैं। उनके परिवार के सामने भूखे मरने की नौबत आ गई है। ऐसे किसानों को कम से कम 25 लाख रूपये का मुआवजा देना चाहिए और जिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण उन किसानों ने आत्महत्या की है उन अधिकारियों के खिलाफ में कार्यवाही होनी चाहिए और क्योंकि माननीय मंत्री जी ने अपने जवाब में इन सब बातों का उल्लेख नहीं किया है। जो 4 मंत्रियों का संयुक्त जवाब आना चाहिए, वह संयुक्त जवाब नहीं आया है। आप इसलिए इसको स्वीकार करें और स्वीकार करके इस पर चर्चा करवायें।
(मीडिया प्रभारी)

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