दो हस्तियों का निधन: छग विधानसभा उपाध्यक्ष मंडावी और जादूगर ओपी शर्मा नहीं रहे,शोक की लहर


रायपुर/कानपुर(खटपट न्यूज़)। रविवार को छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश प्रांत की दो हस्तियों का निधन हो गया। छत्तीसगढ़ में विधानसभा के उपाध्यक्ष और भानुप्रतापपुर के विधायक मनोज मंडावी का हार्ट अटैक से निधन हो गया वहीं महान जादूगर शर्मा ने लंबी बीमारी के बाद दुनिया को अलविदा कह दिया। इन दोनों के निधन से शोक की लहर दौड़ पड़ी है।

विधायक मनोज मंडावी ने धमतरी के बठेना अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन पर सीएम भूपेश बघेल, पीसीसी चीफ मोहन मरकाम, विधायक, मंत्री कवासी लखमा समेत कई नेताओं ने दु:ख जताया है। पहले भी मजोज मंडावी को अटैक आ चुका था, लेकिन आज जो अटैक आया उसने उनकी जान ही ले ली।
वर्ष 1998 में अविभाजित मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य निर्वाचित होने से उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ था। छात्र राजनीति में वे लंबे समय से सक्रिय रहे। उनके निधन से छत्तीसगढ़ की राजनीति को एक गहरा आघात पहुंचा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित राज्य के तमाम राजनीतिक नेताओं, जनप्रतिनिधियों, शुभचिंतकों ने उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

एक अन्य घटनाक्रम में दुनिया में अपनी जादूगरी का परचम फहराने वाले कानपुर के मशहूर जादूगर ओपी शर्मा का शनिवार रात निधन हो गया। वह किडनी की बीमारी के चलते फॉर्चून हॉस्पिटल में भर्ती थे। 76 वर्षीय शर्मा शहर के बर्रा-2 में रहते थे। उन्होंने फॉर्च्यून हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलते ही शहर व जादू प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ पड़ी। रंगमंच और इंद्रजाल की दुनिया का हर शख्स गमगीन हो गया।
ओपी शर्मा मूल रूप से बलिया के रहने वाले थे. वह कानपुर में स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री में कम करने आए थे और यहीं से फिर जादूगर बन गए. उन्होंने अपनी जिंदगी में 34 हजार से ज्यादा जादू के शो किए. उनके परिवार में पत्नी, तीन बेटे और एक बेटी है. ओपी शर्मा के छोटे बेटे सत प्रकाश शर्मा भी जूनियर ओपी शर्मा कहे जाते हैं. वह भी जादू दिखाते हैं. ओपी शर्मा समाजवादी पार्टी की तरफ से कानपुर में गोविंद नगर से विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके थे. ओपी शर्मा के घर का नाम भूत बंगला है, जो शहर की एक पहचान बन चुका है. बर्रा से पहले वह शास्त्रीनगर इलाके में रहते थे. जादूगर ओपी शर्मा कभी भी किसी भी शहर में शो करने जाते थे तो उनके साथ 100 से अधिक लोगों का काफिला होता था. उनकी टोली में सहयोगी पुरुष एवं महिला कलाकारों, संगीतकारों, गायकों, मेकअप मैन और प्रकाश नियंत्रक जैसे कई सहयोगी होते थे. जब एक जगह से दूसरी जगह ओपी शर्मा रवाना होते थे तो इंद्रजाल का सारा सामान 16 से अधिक ट्रकों में समाता था।

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