Sunday, March 22, 2026
Home छत्तीसगढ़ दुर्भाग्य:पेंशन के इंतजार में मौत भी आ गई,इलाज के लिए रुपये नसीब...

दुर्भाग्य:पेंशन के इंतजार में मौत भी आ गई,इलाज के लिए रुपये नसीब नहीं…


जांजगीर (खटपट न्यूज)। दुर्भाग्य है! सरकारी सिस्टम की भेंट एक और रिटायर कर्मचारी चढ़ गया। रिटायरमेंट के 3 साल तक एक पटवारी अपने पेंशन के लिए गिड़गिड़ाता रहा, अपनी बीमारी की दुहाई देता रहा, लेकिन जिम्मेदारों का दिल नहीं पिघला और फिर एक दिन इलाज के अभाव में रिटायर कर्मचारी की मौत हो गयी। अब मौत के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने सड़क जाम कर दिया, तो वहीं परिजनों के गुस्से के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
मामला जांजगीर का है, जहां रिटायर पटवारी की मौत पर भड़के परिजनों ने एनएच-49 को जाम कर दिया। हालांकि पटवारी का कार्यस्थल कोरबा था, जहां से वो रिटायर हुआ था। रिटायरमेंट के बाद पटवारी मंगतूराम भैना अपने पैतृक क्षेत्र जांजगीर के मुलमुला गांव में आकर रहने लगा। परिजनों का आरोप है कि रिटायरमेंट के बाद पटवारी को ना तो पेंशन और ना ही अन्य सरकारी लाभ दिया गया। 2019 में रिटायरमेंट के बाद से कई दफा पटवारी मंगतूराम ने दफ्तरों के चक्कर लगाये, लेकिन उसका पेंशन शुरू नहीं हो सका, लिहाजा बिना पेंशन के इलाज के अभाव में उसकी मौत हो गयी।
कोरबा के पाली में पटवारी थे मंगतूराम
मुलमुला गांव निवासी मंगतू राम भैना, कोरबा जिले के पाली क्षेत्र में पटवारी थे और 3 साल पहले रिटायर्ड हुए थे. वे बीमारी से ग्रसित थे. परिजन ने पेंशन स्वीकृति और अन्य फंड से राशि देने सम्बन्धी आवेदन दिया था, लेकिन 3 साल बाद भी कोई पहल नहीं हुई. परिजन का कहना है कि रुपये के अभाव में रिटायर्ड पटवारी का समुचित इलाज नहीं हो सका, जिससे उनकी जांजगीर के जिला अस्पताल में मौत हो गई.
कलेक्टर जितेंद्र शुक्ला ने लिया संज्ञान
इधर, इस घटना पर कलेक्टर जितेंद्र शुक्ला ने तुरंत संज्ञान लिया। कलेक्टर ने एक न्यूज चैनल में बताया कि पटवारी का कार्यस्थल कोरबा था, रिटायरमेंट के बाद वो जांजगीर में रह रहा था। रिटायरमेंट के उसकी सारी लाइवलिटी देय कोरबा से होनी है, कोरबा के उच्चाधिकारियों से बात की है और इस प्रकरण के तुरंत निपटारे के लिए कहा है।

Advertisement Carousel