0 बड़े पदाधिकारी आत्ममुग्ध,स्वागत की उपेक्षा से व्यथित हैं अन्य
कोरबा (खटपट न्यूज)। कोरबा शहर में गृहमंत्री अमित शाह की सभा सफल तो हुई लेकिन कई सवाल भी उभरकर सामने आए हैं। इसमें सबसे बड़ा सवाल जो भाजपा के पदाधिकारियों से लेकर जिले के सक्रिय कार्यकर्ताओं के बीच तैर रहा है, वह पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बीच यहां दिखी दूरियों को लेकर है। स्वागत-सत्कार में तो दोनों नेताओं का आमना-सामना भी हुआ लेकिन साथ लेकर आने और जाने में जो कुछ नजर आया वह अप्रत्याशित कहा जा रहा है।

रायपुर से लेकर कोरबा तक इस बात की चर्चा गर्म है। निर्धारित प्रोटोकॉल के मुताबिक श्री शाह रायपुर में नहीं उतरे तो डॉ. रमन सिंह को साथ लाना संभव नहीं हो सका लेकिन जब इसकी जानकारी हुई तो डॉ. सिंह ने राज्य शासन से हेलीकाप्टर मांगकर कोरबा की दूरी तय की। यहां गृहमंत्री शाह सर्वमंगला मंदिर से स्टेडियम हेलीपेड लौटे तो डॉ. रमन ने उनका स्वागत किया। बमुश्किल 4-5 मिनट की मुलाकात हुई और इसके बाद श्री शाह अकेले ही रायपुर के लिए रवाना हुए। उनके पीछे-पीछे डॉ. रमन सिंह भी बमुश्किल 5-10 मिनट के बाद रायपुर के लिए उड़ान भरे। कोर कमेटी की बैठक में गृहमंत्री श्री शाह बमुश्किल 10-11 मिनट शामिल हुए और निर्देश देकर चले गए। डॉ. रमन सिंह भी इस दौरान उपस्थित रहे। माना जा रहा था कि गृहमंत्री के साथ डॉ. रमन भी जाएंगे लेकिन साथ नहीं ले गए। इसके बाद डॉ. रमन अनमने से होकर यहां से अकेले ही रायपुर रवाना हुए। पार्टी के कुछ पदाधिकारियों से चर्चा में वे भी इस बात को लेकर आश्चर्यचकित हैं कि गृहमंत्री श्री शाह कारणवश झारखंड से सीधे कोरबा आ गए इसलिए रायपुर रुकना नहीं हुआ, लेकिन यहां से रायपुर जाते वक्त भी डॉ. रमन सिंह को साथ क्यों नहीं ले गए,इसे वे भी समझ नहीँ पा रहे हैं। क्या भाजपा में भीतर ही भीतर कुछ और खिचड़ी पक रही है जिसका एक अधपका दाना यहां महसूस किया गया? क्या आगामी चुनाव में डॉ. रमन चेहरा नहीं होंगे या उन्हें इसीलिए बड़े लीडर के साथ एक्सपोज करने से परहेज किया जा रहा है? दूसरी तरफ सभा में श्री शाह ने डॉ. रमन के 15 साल की उपलब्धियों को गिनाया,चावल बाबा भी कहा। खैर, कारण कुछ भी हो लेकिन डॉ. रमन सिंह से गृहमंत्री श्री शाह की दूरियों को लेकर भाजपा के गलियारे में चर्चा गर्म जरूर है।
0 एक तीर से कई निशाने साध गए शाह
इस सभा के जरिये एक तीर से कई निशाने साधे गए। सरकार को घेरा गया तो नक्सलवाद को चुनौती देकर उसके खात्मे की संभावित अवधि भी बता गए। पिछड़ा वर्ग और आदिवासी कार्ड भी खेल गए। धर्म और आस्था की भी बातों से लोगों को भाव विभोर किया तो डीएमएफ के मुद्दे पर सवाल उठाकर उपस्थित अनेक लोगों के मन की बात कह दी जो इसके उपयोग के तौर तरीके से क्षुब्ध हैं। मोदी सरकार की उपलब्धियों को गिनाकर आर्थिक आंकड़ों का बड़ा पहाड़ खड़ा कर दिया। अपने उद्बोधन के शुरू से अंत तक वे भाजपा की सरकार राज्य व केंद्र में बनाने के लिये उपस्थित जनसमूह जिसमे 90 फीसदी भाजपा के ही कार्यकर्ता थे, को तैयार करते रहे,उनसे संकल्प लिवाते रहे, हाथ उठाकर हामी भरवाते रहे।
0 क्या शाह की धमक लंबे समय तक कायम रख सकेंगे?
श्री शाह तो कोरबा के रास्ते छत्तीसगढ़ में चुनावी शंखनाद करके चले गए लेकिन सवाल यह है कि क्या उनकी धमक लंबे समय तक भाजपा कायम रख सकेगी। कोरबा जिला की चारों विधानसभा सीट सहित लोकसभा की सीट को अपने नाम करा पाने में भाजपाई कितना सफल हो पाएंगे, यह तो वक्त बताएगा पर अभी सभा के बाद वे आत्ममुग्ध जरूर हैं। वैसे भी भाजपा के कार्यकर्ता अलग-अलग कंधे पर सवार होकर चल रहे हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। हालांकि अपने-अपने गुटों में मशगूल भाजपाई संगठन के नाते कार्यक्रम की सफलता से गदगद हैं किन्तु दूसरी ओर अनेक पदाधिकारी खासकर सक्रिय पदाधिकारी, कार्यकर्ता और मंडल के पदाधिकारी जो अमित शाह से मिलने व स्वागत करने से उपेक्षित रह गए, वे व्यथित जरूर हैं।















