डीजल, कबाड़, जुआ-सट्टा पर कार्यवाही, कोयला व रेत के चोरों पर कब टेढ़ी होगी निगाह


कोरबा(खटपट न्यूज़)। प्रदेश सरकार के मुखिया भूपेश बघेल की मंशा, पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी और बिलासपुर-सरगुजा रेंज के आईजी रतनलाल डांगी के निर्देश पर अवैध कारोबारियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्यवाही शुरू हो गई है।लुक-छुप कर डीजल निकालने वाले छोटे-छोटे चोरों को भी बख्शा नहीं जा रहा है। गली-मोहल्लों के सटोरिए शांत पड़ गए हैं। जुआ के आधा दर्जन से अधिक फड़ फिलहाल बेजार हैं। कबाड़ पर अंकुश लगा दिया गया है। डीजल चोरों को खोज-खोज कर पकड़ा जा रहा है तब कोयला और रेत माफिया/जमाखोर कैसे नजरों से ओझल हुए हैं?

फाइल फोटो

पुलिस अधीक्षक बदलने के साथ ही जिले का पुलिसिया तेवर भी शुरुआत के दिनों में अलग-सा नजर आता है तो वही शीर्ष अधिकारियों के फरमान के बाद सख्ती भी देखने को मिलती है। ऐसा ही इन दिनों जिले में हो रहा है। अपराधी अपराध करने के बाद जेल जाता है और जमानत छूट कर बाहर आता है, इसके बाद वह शांत नहीं बैठता बल्कि पुनः अपराध को अंजाम देने में लग जाता है, भले उसके तौर- तरीके अलग हो जाते हैं। ऐसे पुराने आदतन अपराधियों पर निगाह रखना जरूरी है।
इस तरह की बातें कोयला चोरों, रेत के माफियाओं पर भी लागू होनी चाहिए जो पूर्व कार्यकाल में तो अपेक्षाकृत नजर नहीं आई लेकिन वर्तमान में बदले हालातों के बाद हो रही ताबड़तोड़ कार्रवाई में भी अब तक किसी कोयला और रेत चोर पर गाज नहीं गिर सकी है। कोयला के जिले में कोल माफिया कोयला से दागदार ना हो यह तो काजल की कोठरी से बेदाग निकल जाने वाली जैसी बात है जो किसी भी सूरत में संभव नहीं। कोयला के पुराने बड़े और मँझले स्तर के तस्कर/चोर/जमाखोर शहर के बाहरी इलाकों में सक्रिय हैं। इनके ठिकानों पर मुखबिर की पहुंच तो है लेकिन हाथ डालने की जहमत न जाने क्यों नहीं उठाई जा रही ? क्या पूर्व के कोयला तस्कर/ कोयला चोर/कोयला माफिया इन दिनों साधू हो गए हैं…! उन्होंने अपना रास्ता और पेशा बदल लिया है…? या फिर कोई अदृश्य वजह है..! यही बात रेत के अवैध कारोबारियों पर भी लागू होती है। विगत वर्ष में ऐसा भी मामला आया जब रेत का अवैध खनन एवं परिवहन करते पाए जाने पर चोरी की धारा संबंधित पर दर्ज हुई। 1- 2 मामले छोड़ दें तो इसके बाद अवैध रेत पकड़े जाने पर सिर्फ जुर्माना और छोड़ने/अभयदान की कार्रवाई हुई है।

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चोरी के मामले दर्ज कराने से यह माना जा रहा था कि रेत के अवैध कारोबार पर कुछ अंकुश लगेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 1-2 मामले छोड़ दें तो किसी भी प्रकरण में अब रेत के अवैध कारोबार पर धारा 379 के तहत चोरी का अपराध दर्ज नहीं हुआ है। नदी-नालों और घाटों से बिना अनुमति रेत का खनन और परिवहन तो आखिर चोरी ही है फिर भला इससे नजरें क्यों फेरी जा रही हैं..?
0 खनिज विभाग का भी काम कर रहा पुलिस अमला
खनिज पदार्थों से जुड़ी सभी तरह की अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना/पकड़े जाने पर कार्यवाही करना/पुलिस में एफआईआर आदि खनिज विभाग का मूल काम है लेकिन दारोमदार पुलिस पर डाला जाता है। संज्ञान में लाये जाने पर विभाग लम्बे तारीख की नोटिस-नोटिस खेल कर बचाने पर ज्यादा जोर देता है। कोयला की चोरी/ तस्करी/ जमाखोरी पर नजर रखना खनिज विभाग का काम है फिर भी वह इस ओर से नजरें फेरे हुए है। पुलिस अपने स्तर पर नि:संदेह दूसरे विभागों के कामकाज में हो रहे अपराध पर अपने अधिकार क्षेत्र में रहते हुए रोकथाम के लिए काम कर रही है किंतु संबंधित विभागों के द्वारा समन्वय स्थापित ना करने और अपने मूल कार्य से लगभग नजरें फेर लेने के कारण दारोमदार पुलिस पर ही टिका हुआ है कि वह अवैध कोयला की जमाखोरी, रेत का अवैध तरीके से किए जा रहे खनन/परिवहन और भंडारण पर करवाई करे ताकि इस तरह के कार्य कर शासन को राजस्व का नुकसान पहुंचाने के साथ ही चोरी/ जमाखोरी जैसा अपराध करने वालों को सबक भी मिले। अवैध कारोबार और गतिविधियों पर लगाम लगाने की इस तरह सख्त कार्यवाही में कोयला और रेत के चोर/अवैध जमाखोर अगर छूट रहे हैं, खनिज टास्क फोर्स खामोश तो सवाल काफी दूर तक पहुंचना जायज है।

00 सत्या पाल 00 (7999281136)

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