
कोरबा। शहर के इमलीडुग्गू में निवासरत 2 वर्षीय बालक एक साल पहले हादसे का शिकार हो गया था। आग से झुलसकर उसका बायां हाथ बुरी तरह जल गया था। ईलाज के बाद भी उसकी मुट्ठी बंद हो गई। धीरे-धीरे घाव सूखता गया परंतु हाथ की उंगलियों में हलचल बंद हो गई। बच्चे के मां-बाप इस बात से बेचैन थे कि बच्चे को आखिर कैसे ठीक किया जाए। इसे लेकर उन्होंने कोसाबाड़ी स्थित सिद्धिविनायक हास्पिटल के अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. शतदल नाथ से ईलाज कराया। डॉ. नाथ ने बच्चे की जांच की। उसकी बंद मुट्ठी को खोलना चुनौती से कम नहीं थी। इस चुनौती के लिए ऑपरेशन की तैयारी शुरू की गई। कार्ययोजना के तहत ऑपरेशन को 4 भागों में विभाजन किया गया। पहले भाग में जुड़ी हुई उंगलियों को अगल किया गया। दूसरे भाग में उंगलियां हाथ की हथेली से चिपक गई थी, उनको अलग किया गया। तीसरे चरण में अलग हुई मुड़ी हुई उंगलियों को जेड प्लास्टि के द्वारा सीधा किया गया। चौथे व अंतिम चरण में घाव को पैर के चमड़ी के सहारे स्कीन ड्राफ्टिंग किया गया।













