कोरबा (खटपट न्यूज)। कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय भारत सरकार द्वारा प्रायोजित जन शिक्षण संस्थान में राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया गया। मुख्य अथिति एमएलसी कंप्यूटर कॉलेज की डायरेक्टर श्रीमती साधना शर्मा ने कहा कि देश की बेटियों की आज लगभग हर क्षेत्र में हिस्सेदारी है लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब लोग बेटियों को कोख में ही मार दिया करते थे। बेटियों का जन्म हो भी गया तो बाल विवाह की आग में धकेल देते थे। बेटियों और बेटों में भेदभाव उनके साथ होने वाले अत्याचार के खिलाफ देश की आजादी के बाद से ही भारत सरकार प्रयासरत हो गई थी। भारत सरकार ने वर्ष 2015 में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना की शुरुवात की जो की बेटियों के प्रति एक जागरूकता अभियान का हिस्सा है।

कार्यक्रम के अंत में जेएसएस के निदेशक ने बताया कि महिला एवं विकास मंत्रालय द्वारा पहली बार 24 जनवरी 2009 को देश में राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया गया। भारत के इतिहास और महिलाओं के सशक्तिकरण में 24 जनवरी का दिन महत्वपूर्ण है। 24 जनवरी को 1951 को प्रेम माथुर भारत की प्रथम महिला कॉमर्शियल पायलट बनी थीं। 24 जनवरी 1950 को भारतीय राष्ट्रगान जन-गण-मन को अपनाया तथा प्रथम बार गाया गया था इस दिन मनाने का कारण देश की बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। कार्यक्रम में एमपी सिंह एपीओ जिला शिक्षा विभाग सहित सावित्री जेना, तृष्या मोहंती, लक्ष्मी चटर्जी, कोयना सिंह, विजय लक्ष्मी महंत, सुनीता राठौर, ज्योति बरेठ, नरेंद्र , किशोर महंत, उमेश, संजय एवं अनीता चौहान उपस्थित थे।
















