Sunday, March 22, 2026
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जांच रिपोर्ट पॉजिटिव, फिर भी मोहल्ले-आम जगह पर संक्रमित या परिजनों के घूमने से बढ़ रहा खतरा, होम आइसोलेशन की बढ़ानी होगी सख्त निगरानी…..


कोरबा(खटपट न्यूज़)। जिले में बढ़ता कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन के प्रयासों को चंद ऐसे लोग पलीता लगा रहे हैं जो जांच रिपोर्ट में कोरोना पाजीटिव तो आ गए हैं लेकिन घर पर रहने की बजाय घर के सामने मजमा लगाकर बैठते हैं या फिर मोहल्ले में घूमते रहते हैं। ऐसे लोगों के लिए निगरानी और ज्यादा बढ़ाने की आवश्यकता प्रभावित क्षेत्र के लोगों ने बताई है।
इस तरह के लापरवाहीपूर्ण मामले नगर निगम सहित ग्रामीण क्षेत्रों से भी सामने आ रहे हैं।

कोरबा निगम क्षेत्र में पुरानी बस्ती, कोरबा शहर, सीतामणी, कर्रानाला, भिलाईखुर्द, रिसदियापारा, सरगबुंदिया, उरगा,आरपी नगर, आरएसएस नगर, एमपी नगर, कोसाबाड़ी, निहारिका,सीएसईबी, सुभाष नगर, एसबीएस कालोनी सहित अनेक इलाके संक्रमण की चपेट में हैं। प्रभावित क्षेत्रों में देखने व सुनने को मिल रहा है कि रैपिड एंटीजन टेस्ट में कुछ ही घण्टे के भीतर परिणाम आने के बाद संक्रमित मिले मरीज जानबूझकर अपने घर से बाहर निकल कर घूमते रहते हैं और उनके परिजन भी सार्वजनिक हुए रहते हैं। कई संक्रमितों के परिजन अपने कार्यक्षेत्र भी पहुंच जाते हैं, दुकान खोलते हैं जबकि उन्हें भी होम आइसोलेट रहना होता है। इसी तरह स्लम एरिया से भी संक्रमित मिल रहे हैं जिनके लिए पृथक कमरा, शौचालय-स्नानागार की सुविधा घर में सम्भव नहीं, फिर भी वह संक्रमित घर पर ही रहता है। ऐसे लोगों से दूसरे स्वस्थ लोगों को भय बना हुआ है।
0 विलंब से पहुँचता है अमला
यहां यह बताना लाजिमी है कि रैपिड एंटीजन से जांच की रिपोर्ट कुछ ही घंटे में मिल तो जाती है लेकिन नगरीय निकाय को इसकी जानकारी दिए जाने के बाद 24 से लेकर 48 घंटे उपरांत ही संबंधित अमला संक्रमित के घर पहुंचता है और उसे दवाई देने के साथ घर के बाहर स्टीकर चिपकाया जाता है। इस बीच संक्रमित अथवा उसके परिजन लोगों की जानकारी के अभाव में किंतु खुद जानबूझकर घूम-फिर लिए होते हैं।
0 अस्पतालों में भी टूट रहे प्रोटोकॉल
शासन व प्रशासन ज्यादा से ज्यादा जांच और टीकाकरण पर जोर दे रहा है। इसके कारण लोगों की संख्या अस्पतालों में बढ़ने लगी है। नि:शुल्क परीक्षण और टीकाकरण का आलम यह है कि अस्पतालों में आने वाले लोगों में भी संक्रमण का खतरा बढ़ने लगा है। एक ही व्यक्ति पर पंजीयन और रिपोर्ट देने का जिम्मा जहां जिला अस्पताल में देखने को मिला वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों सहित औद्योगिक उपक्रमों के डिस्पेंसरी में भी जांच के लिए सैम्पल लेने वाले के इर्द-गिर्द ही भीड़ नजर आती है। इस तरह का नजारा एसईसीएल कुसमुंडा के वैक्सीनेशन सेंटर में भी देखने को मिली जहां सुबह 8 बजे से ही लोगों की लाइन लगनी शुरू हो गई और पहले टीकाकरण के फेर में भीड़ बढ़ती रही। इसी तरह अन्य अस्पतालों में सैम्पल लेने के लिए उपयोग में आने वाले सामग्रियों का असावधानीपूर्वक उपयोग सैम्पल लेने और देने वालों के आसपास मजमा लगाकर खड़े दूसरे लोगों में संक्रमण का खतरा बढ़ता है। जांच कराने के लिए सरकारी अस्पतालों में पहुंचने वालों ने व्यवस्था में सुधार लाने की जरूरत बताई है।

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