संक्रमित के उपचार में देरी के साथ संक्रमण का बढ़ता है खतरा

कोरबा (खटपट न्यूज)। कोरोना का संक्रमण की जानकारी के लिए जितना महत्वपूर्ण जांच हेतु सैम्पल देना है, उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है कि संबंधित व्यक्ति अपने घर का सही और पूरा पता दर्ज कराए, अपना सही और चालू मोबाइल नंबर भी एंट्री करवाए। अक्सर ऐसी बातें और शिकायतें सामने आ रही हैं कि जांच में रिपोर्ट पॉजीटिव आने के बाद संबंधित व्यक्ति के मकान को खोजने और उस तक दवाई पहुंचाने तथा उसके घर पर होम आइसोलेशन का स्टीकर लगाने में काफी दिक्कत मैदानी अमले व स्वास्थ्य कर्मी को उठानी पड़ रही है। इस तरह की भ्रामक जानकारियां देने का खामियाजा सही समय पर संक्रमित को होम आइसोलेशन पर रखने अथवा उसे निवास से लेकर कोविड अस्पताल तक पहुंचाने और होम आइसोलेशन की अनुमति प्राप्त कर घर पर ही दवाई देने तथा होम आइसोलेशन के दौरान निरंतर निगरानी रखने के वक्त उठानी पड़ती है। हालांकि इस तरह की गड़बड़ी काफी दिनों से सामने आ रही है लेकिन जब 27 सितंबर को मेडिकल रिपोर्ट में राजस्व मंत्री के पंप हाऊस डी-1 शासकीय बंगला के पता से एक साथ 10 संक्रमित मिले तो ज्ञात हुआ कि सभी के निवास एक समान न होकर अलग-अलग क्षेत्र में निवासरत है किंतु जांच स्थल का पता लिखवा देने से कहीं न कहीं इन तक दवाई आदि पहुंचाने में लगे मैदानी अमले को दिक्कत लाजिमी है। यह बात सामने आई कि इनमें एक राजस्व मंत्री के निज सहायक हंै जो दर्री क्षेत्र के निवासी है, इसी तरह दूसरे संक्रमित नगर निगम के कर्मचारी बताए गए लेकिन इन सभी के पता सही तरीके से नहीं लिखवाने के कारण भ्रम उत्पन्न होता रहा। इसी तरह अनेक लोगों के द्वारा जांच हेतु सैम्पल देते समय अपने कार्यस्थल का पता दर्ज कराया जा रहा है जबकि वे वहां कार्य करते हैं लेकिन निवास कहीं और है। कार्यस्थल का पता बताने से उनके निवास स्थल को तलाशने में भी काफी परेशानी मैदानी अमले को उठानी पड़ती ही है।
0 जांच के दौरान सही पता और मोबाइल नंबर दर्ज कराएं : कलेक्टर

कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल ने अपील की है कि कोरोना संक्रमण के जांच की रिपोर्ट पॉजिटिव मिलते ही यदि मरीज को तत्काल बेहतर इलाज की सुविधा चाहिये तो उन्हें जांच के दौरान अपना सही पता और मोबाईल नम्बर दर्ज कराना चाहिये। सही पता और मोबाइल नम्बर से कोरोना संक्रमित की पहचान करना स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के लिये आसान होता है और इससे संक्रमित मरीज के घर तत्काल पहुंच कर उसे जरूरी इलाज की सुविधा समय पर उपलब्ध करायी जा सकती है। कलेक्टर ने इन कारणों से बनी विपरीत परिस्थितियों को संज्ञान में लेते हुए कहा है कि कोरोना संक्रमित मरीज को समय पर अनुशंसित इलाज नहीं मिल पाता है जो स्वयं उसकी जान के लिये खतरनाक है। गलत या अधूरे पते या गलत मोबाइल नम्बर के कारण संक्रमित से सम्पर्क नहीं होने से उसे कोविड अस्पताल तक लाने में भी असुविधा और देरी होती है जिससे मरीज के खुद के परिजन, बच्चों और आसपास के लोगों के भी संक्रमित होने का डर भी बना रहता है। देर से इलाज मिलने पर मरीज खुद भी गंभीर अवस्था में पहुंच सकता है और बीमारी के कारण उसकी जान भी जा सकती है। उन्होंने कोरोना मरीजों के बेहतर इलाज, उनके परिजनों की सुरक्षा के साथ-साथ अन्य दूसरे लोगों को संक्रमण से बचाने के लिये प्रशासन द्वारा किये जा रहे प्रयासों में सहयोग करने की अपील लोगों से की है।















