कोरबा (खटपट न्यूज़)। कभी-कभी कुछ ऐसे ही घटनाएं घटित हो जाती हैं या ऐसा कुछ देखने को सहज ही मिल जाता है जो ना सिर्फ हास्यास्पद लगता है बल्कि अनेक प्रश्न भी खड़े करता है। डीएमएफ की भारी-भरकम राशि वाले कोरबा जिले में कुछ ऐसा ही नजारा कोरबा-चाम्पा मार्ग पर ग्राम बरबसपुर की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी से पहले नजर आता है। 24 घंटे चालू रहने वाले इस एकल मार्ग पर जिसे फोरलेन के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी को दिया गया है लेकिन पीडब्ल्यूडी का जिम्मा अभी खत्म नहीं हुआ है, इस सड़क पर बना काफी पुराना पुल अक्सर व्यवस्था की खामियों को उजागर करता रहा है।

सड़क पर बने गड्ढों से जहां राह मुश्किल होती रही वहीं पिछले दिनों में इस सड़क के गड्ढों को भरा तो गया लेकिन उसके किनारे अभी हादसे की वजह बने हुए हैं। हास्यास्पद तो यह है कि करोड़ों रुपए का डीएमएफ मद रखने वाले जिले में इस पुलिया को मजबूत रेलिंग का सहारा नहीं मिल सका है। नेशनल हाईवे में शामिल हो चुकी है सड़क भविष्य में जब फोरलेन बनेगी तब बनेगी, लेकिन जब तक व्यवस्था वर्तमान की तरह है तब तक तो दोपहिया से लेकर भारी वाहन चालकों को सुगम और निर्भय आवागमन की जरूरत महसूस होती रहेगी। इस पुलिया के नीचे से नाला बहता है और पुलिया के दोनों किनारों पर सीमेंट या लोहे के पाइप की रेलिंग की बजाय इस ओर से उस छोर तक तक पतली-पतली लकड़ियां खड़ी कर प्लास्टिक से बांध दिया गया है। यह बड़ा ही हास्यास्पद है कि डण्डों के सहारे हादसों को डालने की कवायद इस पुल पर हुई है।

कोरबा से चाम्पा और इस रूट से होकर अलग-अलग क्षेत्रों के लिए जाने वालों का यह प्रमुख मार्ग है। 24 घंटे इस मार्ग से आवागमन होता रहता है जिसमें कई ऐसे भी चालक हैं जो ओवरटेकिंग से बाज नहीं आते। इनकी बदौलत सामने वाला बचने-बचाने के चक्कर में भी हादसे का शिकार हो जाता है। यदि पुल पर काम चलाऊ ही सही लेकिन व्यवस्था के तहत ठीक-ठाक रेलिंग बना दी जाय तो आगामी नई व्यवस्था होते तक कम से कम राहत तो रहेगी।
इस रास्ते से का अक्सर उपयोग करने वाले शैलेष कहते हैं कि यह विभागीय अधिकारियों की उदासीनता और अनदेखी का परिणाम है। संजय कुमार बताते हैं कि यह वर्षों पुराना पुल है जिसकी भी अनदेखी हो रही है। राजकुमार बताते हैं कि रास्ते पर अक्सर अंधेरा भी रहता है और आजकल वाहनों की चुंधिया देने वाली हेडलाइट से बचकर चलना और इस पुल से गुजरना जान हथेली पर रखकर आवागमन करने के समान है। किशन कुमार कहते हैं कि सरकारें बदल गईं लेकिन इस पुल के अलावा और भी पुल-पुलिया की दुर्दशा सुधारने का नाम नहीं ले रही है। भविष्य की कौन जाने लेकिन वर्तमान में तो डर-डर कर आवागमन करना पड़ता है।

00 सत्या पाल 00 (7999281136)














