
कोरबा (खटपट न्यूज)। कोरोना काल में ग्रामीण बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो इसके लिए शिक्षक अलग-अलग नवाचार कर रहे हैं। बच्चों में शिक्षा की अलख जगाने कभी मोहल्ला क्लास लगाकर तो कभी खेत में मचान बनाकर शिक्षक सुनील कुमार जायसवाल बच्चों को पढ़ाई से जोड़े हुए रखे हैं। विकासखंड पाली के अंतर्गत ग्राम पंचायत सरई पाली के अधीनस्थ नर्सरी पारा शासकीय प्राथमिक शाला के शिक्षक सुनील कुमार जायसवाल पिछले करीब चार माह से ग्राम पंचायत के विभिन्न मुहल्लों में जाकर व खेत में मचान बनाकर ग्रामीण बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। शिक्षक को बच्चे बेहद पसंद करते हैं। मोहल्ला क्लास लगाकर शिक्षक सुनील बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। गांव में लगने वाले मोहल्ला क्लास की लोग तारीफ करते नहीं थकते। बच्चे भी खेत में बने मचान में बैठकर पढ़ाई करने में रूचि ले रहे हैं। शिक्षक सुनील कुमार दिव्यांग होने के बावजूद भी उनके हौसले बुलंद हैं। वे कोरोना संक्रमण से बचने के लिए बनाई गई गाइडलाइन को फॉलो करते हुए बच्चों को पढ़ाते हैं।
मोहल्ला क्लास में पढ़ने के लिए बच्चे बड़े ही उत्सुक रहते हैं। जैसे ही मास्टर जी खेत में बच्चों को बुलाते है तो वे भागते हुए अपनी जगह पर आकर बैठ जाते हैं। सुनील कुमार जायसवाल ने बताया कि मोहल्ले के 10 से ज्यादा बच्चे रोजाना पढ़ने आते हैं। राज्य सरकार भी बच्चों की पढ़ाई को लेकर योजनाएं बना रही है, जिससे कोरोना काल में उनकी शिक्षा प्रभावित न हो। इसी से जुड़ते हुए ये नवाचार करने का इन्हें आइडिया मिला। बच्चों को पढ़ाने में उन्हें खुशी मिलती है। वे कहते हैं कि बच्चों को स्कूल जैसी पढ़ाई कराने के लिए पूरी कोशिश करते हैं। सुनील कुमार शारीरिक रूप से दिव्यांग होते हुए भी घंटो खड़े होकर किताब पकड़ कर बच्चों को पढ़ाते नहीं थकते। वहीं बच्चे भी खेत में बने मचान में बैठकर पढ़ाई करने में बेहद रुचि रखते हैं। कोरोना संकट काल में बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखना सबसे चुनौतिपूर्ण काम था, लेकिन शिक्षक सुनील कुमार जायसवाल ने अपना दायित्व निभाते हुए इस बेहतरीन नवाचार का इजाद किया।
खास है इनका मोहल्ला क्लास !
कोरबा जिले के पाली विकासखंड शिक्षा अधिकारी टीपी उपाध्याय व सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी मणिराम मरकाम ने भी नर्सरी पारा का दौरा कर शिक्षक सुनील कुमार जायसवाल की अनूठी पहल सराहना की। वे कहते हैं यह पहल दूसरे शिक्षकों के लिए प्रेरणा है। कोरोना काल में शिक्षा के लिए किए गए ये तमाम नवाचार काबिल-ए-तारीफ है। इससे अन्य शिक्षकों को मोटिवेशन तो मिल ही रहा है, साथ ही बच्चे भी इंजाए के साथ पढ़ाई कर रहे हैं।















