Friday, April 3, 2026
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कोरबा:FIR में कांप रहे CEO के हाथ,मामला अब कोर्ट की ओर

0 जनपद अध्यक्ष के रोजगार सहायक पति ने किया है फर्जीवाड़ा
0 फर्जी बिल गायब करने की साजिश का अंदेशा,शिकायतकर्ता को षड्यंत्र का भय

लखन कंवर जिसने किया है फर्जीवाड़ा

कोरबा(खटपट न्यूज़)। जांच में शासन से फर्जीवाड़ा करना प्रमाणित हो जाने के बाद भी एफआईआर कराने में हीला-हवाला किया जा रहा है। एफआईआर की अनुशंसा कर जनपद सीईओ ख़ामोश बैठ गए हैं जबकि उन्हें स्वयं अथवा विभागीय कर्मी को प्रार्थी बनकर एफआईआर दर्ज कराना चाहिए। जनपद से लेकर जिले के अधिकारी किसी भय और दबाव के वशीभूत होकर काम कर रहे हैं,हालातों से ऐसा ही लगता है। अब जल्द ही मामला न्यायालय जाने की तरफ अग्रसर है, जिसकी तैयारी की जा रही है।
मामला करतला ब्लाक के ग्राम पंचायत साजापानी का है। यहां के रोजगार सहायक लखन कंवर जो कि जनपद अध्यक्ष के पति भी हैं, के द्वारा सरकारी राशि का अवैध तरीके से आहरण कर गबन करने व फर्जी रसीद/कैश मेमो से बिलिंग का काम किया गया है।
शिकायतकर्ता छत्तीसगढ़ मानव अधिकार जेजेएफ के प्रदेश सदस्य व सरगुजा संभाग प्रभारी अधिवक्ता शिवचरण चौहान की शिकायत पर करतला जनपद सीईओ एमएस नागेश द्वारा कराई गई जांच में आरोप सही पाए गए। ग्राम पंचायत साजापानी के रोजगार सहायक लखन कंवर, वर्ष 2015-16 से 2018-19 तक सरपंच श्रीमती मोहन बाई कंवर, सचिव पुष्पेन्द्र पैकरा और परमानंद राजवाड़े के कार्यकाल में रोजगार सहायक लखन कंवर द्वारा कुल 47 बिल एवं 43 लाख 10 हजार 200 रुपए का उपयोग करना पाया गया। राशि गबन के लिए फर्जी रसीद और कैश मेमो का उपयोग किया गया जो जय हनुमान ट्रेडर्स कांशीरानी चौक के नाम पर जारी किया गया जबकि इस नाम का कोई फर्म है ही नहीं। इस शिकायत की जांच उपरांत सीईओ के द्वारा संबंधितों पर एफआईआर दर्ज करने जिला पुलिस अधीक्षक को जांच प्रतिवेदन सहित अनुशंसा पत्र प्रेषित किया गया किन्तु आज तक एफआईआर नहीं हो सकी है। शिकायतकर्ता ने पुन: एसपी को पत्र लिखते हुए सूत्रों के हवाले से कहा है कि फर्जी बिल को जिला पंचायत सीईओ नूतन कंवर, संबंधित सचिव व रोजगार सहायक गायब करने के षड्यंत्र में हैं और उसके तथा हितबद्ध लोगों के साथ अप्रिय घटना को अंजाम दे सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो उसके जिम्मेदार उपरोक्त अधिकारी, कर्मचारी व संबंधित पुलिस होगी जिसके द्वारा संबंधित दस्तावेजों की जप्ती व एफआईआर अब तक नहीं की गई है।
0 जांच में दिलेरी तो एफआईआर में पीछे क्यों?
इस पूरे फर्जीवाड़ा में यह बात भी सामने आई है कि शिकायत को पूर्व में रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया था और गंभीरता नहीं दिखाई गई। जनपद सीईओ एमएस नागेश ने जांच में दिलेरी दिखाई और फर्जीवाड़े को उजागर किया लेकिन इसके बाद आखिर ऐसा क्या घटनाक्रम हुआ या कोई दबाव का वातावरण बना है कि अब एफआईआर कराने में वही दिलेरी नहीं दिखा रहे। हालांकि चर्चा करने पर वे बातों को गोलमोल करते हुए इधर- उधर टाल रहे हैं। जिला पंचायत सीईओ के द्वारा भी इस मामले में कोई संज्ञान नहीं लिया जा रहा है जबकि शासन से छल करना प्रमाणित हो चुका है। सूत्र बताते हैं कि पिछले दिनों उरगा थाना में शिकायतकर्ता को तलब कर उनकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने की लिखापढ़ी की गई लेकिन यह एफआईआर कहीं दब गई है। अब उरगा पुलिस और जनपद के सीईओ से लेकर जिले के अधिकारी न जाने किस दबाव में हैं कि प्रमाणित अपराध में भी मामला दर्ज नहीं हो पा रहा है। बताया जाता है कि करतला क्षेत्र के स्थानीय नेता से लेकर जिला पंचायत की राजनीति में सक्रिय और आगामी दिनों में विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी (रामपुर नहीं) में लगे एक नेता के दबाव में इस फर्जीवाड़े को दबाया जा रहा है। खबर यह भी है कि जिला पंचायत प्रशासन रिकवरी पर जोर दे रहा है और यदि रिकवरी हो भी जाती है तो किए गए अपराध का दंड लखन कंवर को कैसे मिलेगा? स्थानीय ग्रामीण इस पूरे मामले में नजर बनाए हुए हैं और कहीं ना कहीं दबी जुबान से कहने से नहीं चूक रहे कि अधिकारियों की वजह से सरकार की भद्द पिट रही है।

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