कोरबा(खटपट न्यूज़)। जिले के 17 गांवों के जरूरतमंद ग्रामीण अपनी जमीनों की रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे हैं। इनके द्वारा आपसी एग्रीमेंट पर ही खरीदी-बिक्री का काम किया जा रहा है, जिसमें कई तरह की व्यावहारिक दिक्कतों की गुंजाईश बनी हुई है।

कोरबा जिले के तहसील करतला के अधीन बरपाली उप तहसील हुआ करता था। छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा विगत वर्ष नए तहसीलों की घोषणा की गई जिनमें बरपाली को तहसील का दर्जा दिया गया। इस संबंध में तत्कालीन कलेक्टर श्रीमती रानू साहू के द्वारा 25 अगस्त 2021 को आदेश जारी किया गया। 1 सितंबर 2021 से बरपाली में तहसील की तरह कामकाज भी होने शुरू हो गए लेकिन यहां के 6 पटवारी हल्कों के 17 राजस्व गांवों के जमीन की रजिस्ट्री पर पेंच फंसा हुआ है। इनमें पटवारी हल्का नंबर 22 लबेद के ग्राम लबेेद, कांशीपानी, जामपानी, छातापाठ, हल्का नंबर 23 के ग्राम ढोड़ातराई, सुपातराई, रींवाबहार, हल्का नंबर 24 के तुमान, लीमडीह, कापूपहरी, हल्का नंबर 25 के ग्राम जुनवानी, गिधौरी, हल्का नंबर 26 के दादरकला, फत्तेगंज व हल्का नंबर 27 चिकनीपाली के ग्राम चिकनीपाली, औराई व गनियारी शामिल हैं।
इनमें से कई गांवों के ग्रामीण शादी- ब्याह सहित बच्चों की पढ़ाई- लिखाई या अन्य पारिवारिक कारणों से अपनी जमीन बेचना चाहते हैं किन्तु बेच नहीं पा रहे हैं। कुछ ग्रामीण ऐसे हैं जिन्होंने जमीन की बिक्री जरूरत के अनुसार कर तो दिया है लेकिन रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है सिर्फ कागज में लिखा-पढ़ी कर काम चलाया जा रहा है। ग्रामीणों ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि जब उनके गांव करतला तहसील के अधीन थे, तब कोई दिक्कत नहीं होती थी लेकिन बरपाली तहसील में शामिल होने के बाद यह समस्या आ रही है।
0 भुईंया सॉफ्टवेयर में सत्यापन नहीं होने से दिक्कत
इस संबंध में जिला उप-पंजीयक पवन मरावी ने बताया कि राजस्व निगम बरपाली के पटवारी हल्का नंबर 22 से 27 तक के 17 गांवों का नाम भुईंया में सत्यापन नहीं हो पा रहा है। पूर्व में ये सभी गांव राजस्व निगम मंडल करतला में आया करते थे जो अब बरपाली में आते हैं। इन गांवों का नाम भुईंया में नहीं दिखाए जाने के कारण सत्यापन करने में कठिनाई हो रही है और इसी वजह से इन गांवों की जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। पटवारियों के लिए बनाए गए भुईंया सॉफ्टवेयर में अपडेशन का कार्य एनआईसी के द्वारा किया जाता है। जिला पंजीयक के द्वारा गांवों और पटवारी हल्का सहित जानकारी प्रेषित कर उप महानिरीक्षक पंजीयन एवं नोडल अधिकारी, आईटी सॉल्यूशन रायपुर को 21 जून को पत्र लिखा गया है किन्तु आवश्यक कार्यवाही आज तक नहीं हो सकी है। राज्य और जिला एनआईसी के द्वारा अपेक्षित ध्यान नहीं दिए जाने के कारण तकनीकी दिक्कत का समाधान नहीं हो रहा है।















