Friday, March 27, 2026
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कोरबा में नाबालिग दौड़ा रहे भारी वाहन, किया हादसा दुकान क्षतिग्रस्त

कोरबा(खटपट न्यूज़)। जिले में परिवहन विभाग, यातायात अमला और पुलिस के समन्वय का अभाव और वाहन मालिकों की लापरवाही की वजह से नाबालिग लोग भी भारी वाहनों का चालन कर रहे हैं। नशे में नाबालिग चालक के द्वारा बुधवारी रिकांडो बायपास मार्ग में हादसा कर दिया गया।

यातायात नियंत्रण को लेकर किए जा रहे तमाम दावों को फेल करती यह दुर्घटना बुधवारी मुख्य मार्ग पर सिसोदिया नर्सिंग होम के सामने बीती रात लगभग 2 बजे हुई। कोयला परिवहन में लगे दो भारी वाहनों की आपस में टक्कर हो गई। इस घटना में सड़क किनारे स्थित रजनी राजपूत की दुकान तहस-नहस हो गई । बाहर आकर देखने पर वह हतप्रभ रह गई। रजनी ने बताया कि एक वाहन का चालक नाबालिक था और शराब के नशे में था। महिला ने अपनी दुकान को हुए नुकसान को लेकर नाराजगी जताने के साथ दुर्घटनाग्रस्त वाहन के पहिए के आगे बैठकर रोना शुरू कर दिया। उनकी मांग है कि उसे हुई क्षति की भरपाई कराई जाए और नाबालिग, नशेड़ी चालको पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

0 वाहन चालकों की नहीं होती जांच, निभाई जाती है औपचारिकता: इस तरह की दुर्घटनाओं के दृष्टिगत यह बताना भी लाजिमी है कि परिवहन विभाग हो या उड़नदस्ता, इनके द्वारा वाहनों के चालकों की नियमित जांच नहीं कराई जाती। जिन संस्थानों में छोटे-बड़े भारी वाहन नियोजित हैं उन प्रबंधन के द्वारा भी अपने संस्थान में वाहन चालान करने वाले चालकों की भी जांच नियमित तौर पर नहीं कराए जाते हैं। इसका पूरा लाभ इस कदर उठाया जाता है कि कई वाहनों में तो गैर फिटनेस वाले चालक वाहन चलाते हैं तो अनेक वाहन बिना हेल्पर के चल रहे हैं। चालकों पर अकेले ही कई फेरा लगाने का जहां दबाव रहता है तो दूसरी ओर वे अपने राहत के लिए नाते- रिश्तेदारों को भी स्टेयरिंग थमा देते हैं। इस तरह की घटनाएं पूर्व में सामने आ चुकी हैं लेकिन पूर्व की घटनाओं से सबक लेकर भविष्य के लिए कोई भी ठोस कार्ययोजना ना तो परिवहन विभाग बनाता है और न ही यातायात अमला। घटना हो जाने के बाद उसे भूलने की प्रवृत्ति तो अपनाई जाती है किंतु सुधार की गुंजाइश को ज्यादा तवज्जो नहीं देते हैं। सड़कों पर दौड़ने वाले भारी वाहनों के चालकों की एल्कोहलिक जांच भी नगण्य है जबकि यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया होनी चाहिए। परिवहन विभाग के द्वारा वाहनों का फिटनेस से लेकर चालकों के संबंध में जांच पड़ताल की कागजी औपचारिकता निभाई जाती है इसमें कोई संदेह नहीं। यदि वाहनों के साथ-साथ चालकों की भी नियमित जांच होती रहे तो हादसों पर लगाम लगाई जा सकती है। हादसों का होना इस बात पर निर्भर करता है कि वाहन का चालक अपने कार्य को किस गति से और किस तरह से अंजाम दे रहा है, अनियंत्रित और अकुशल हाथों में वाहन रहे तो हादसा होना तय है।
00 सत्या पाल 00 (7999281136)

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