Monday, March 23, 2026
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कोरबा : नया बस स्टैंड में बढ़ती गुंडागर्दी से शहर के अमन-चैन को फिर खतरा..विवाद बसों के संचालन का

कोरबा (खटपट न्यूज़)। कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन की मार बस संचालकों ने भी झेली है। बस संचालन के कारोबार से जुड़े एजेंट से लेकर चालकों, हेल्परों की रोजी-रोटी पर भी काफी असर पड़ा। लंबे समय के बाद एक बार फिर बसों का संचालन शुरू तो हो गया है किंतु वर्चस्व/एकाधिकार की लड़ाई में गुंडागर्दी फिर से शुरू हो गई है।

सर्वाधिक खराब हालत नया बस स्टैंड की है जहां अपना राज चलाने की कोशिशों में लगातार लगे रहने वाले और गुट के रूप में बस संचालन का काम कराने वाले एक समूह विशेष के लोगों के द्वारा वाद- विवाद की स्थिति निर्मित की जाने लगी है। पिछले 2 दिनों से नया बस स्टैंड में अशांति का माहौल निर्मित हो रहा है। यह चिंतनीय है कि बिना परमिट के बसें चलती रही हैं और फिटनेस शर्तों का भी उल्लंघन बे रोक-टोक होता आया है परंतु परमिट रूट के आधार पर चलने वाली बसों के संचालन में भी कोई न कोई बात लाकर व्यवधान उत्पन्न किए जाने से संबंधित बस के एजेंट और कर्मचारियों में अनहोनी का भय व्याप्त है। उल्लंघन के मामले तो पकड़े भी जा चुके हैं लेकिन सांठगांठ के कारण ज्यादा कुछ नहीं हो पाया।
बसों के संचालन में एकाधिकार कायम करने का यह सिलसिला कोई आज का नहीं बल्कि काफी पुराना है। कई ऐसे मौके आ चुके हैं जब बसों के संचालन को लेकर खूनी संघर्ष भी हुआ है। यह विडंबना ही है कि जिला प्रशासन, परिवहन विभाग, पुलिस प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों के द्वारा मिलकर समस्या का आज तक समाधान नहीं निकाला जा सका है। इनकी अदूरदर्शिता तथा व्यवस्थाओं को सुचारू नहीं करने का खामियाजा नया बस स्टैंड में आए दिन संघर्ष के रूप में भुगतना पड़ रहा है। पिछले 2 दिनों से यहां जो हालात निर्मित हुए हैं उससे पुलिस महकमा वाकिफ ना हो यह संभव नहीं लेकिन पुलिस के कर्मचारी भी दबंग एजेंटों के साथ बातचीत कर उन्हें ही बढ़ावा देने का काम करते हैं। आज सोमवार को भी दोपहर के वक्त करीब 2 बजे एक बस के संचालन से जुड़े युवक ने एकाधिकार की मंशा रखने वालों के इशारे पर शराब के नशे में खूब हंगामा किया, दूसरे कंपनी की बस को टाइमिंग होने के बाद भी भगा दिया। करीब आधे घण्टे चले हंगामे की भनक तक पुलिस को नहीं लग पाई। यह बड़ी ही गंभीर बात है कि बताने पर पुलिस के कर्मचारी हालातों से अपने अधिकारियों को अवगत कराने की बजाय एजेंटों से ही बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश करते हैं। ऐसे में पीड़ित पक्ष को न्याय नहीं मिल पाता और स्थाई समाधान भी नहीं हो पा रहा है। इस विषय में परमिट शर्तों के आधार पर बसों का संचालन, बसों के आने और छूटने की टाइमिंग, किसी भी तरह का अवरोध उत्पन्न ना होने और शहर के अमन-चैन में कोई खतरा उत्पन्न ना हो इसके लिए संयुक्त रूप से अधिकारियों को कार्य करने की आवश्यकता है। प्रशासनिक उदासीनता और समन्वय के अभाव में कोई बड़ी बात नहीं कि एकाधिकार कायम करने की मंशा रखने वाले तथाकथित बस कर्मचारियों के कारण शहर का वातावरण दूषित हो जाए।

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