Saturday, March 28, 2026
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कोरबा:पूर्व TI लीलाधर का प्रयास,पाली थाना को मिली सौगात…


0 आगंतुक कक्ष और महिलाओं के लिए बना नया संवेदना कक्ष

कोरबा-पाली(खटपट न्यूज़)। अपने कार्यस्थल थाना-चौकी को बेहतर बनाने के साथ-साथ यहां आने वाले फरियादियों और उनके साथ पहुंचने वाले लोगों खासकर महिलाओं की भी सुविधा का ख्याल रखना थाना प्रभारी की जिम्मेदारी बनती है। कुछ ऐसी संवेदनशील व दूरगामी सोच रखने वाले थानेदारों ने अपने पदस्थापना काल में थानों को व्यवस्थित करने का काम किया है। वह भले ही इस जिले से दूसरे जिले जा चुके हैं लेकिन उनके द्वारा किए गए कार्य आज भी लोगों के जेहन में कायम हैं।

कोरबा जिले के सीमांत पाली में स्थापित थाना के पूर्व थानेदार निरीक्षक लीलाधर राठौर ने अपने कार्यकाल में जो नींव रखी, वह आज दो भवनों के रूप में तैयार है। अब इसके लोकार्पण का इंतजार है। पाली थाना प्रभारी के तौर पर लीलाधर राठौर ने 20 मार्च 2020 से जून 2021 तक का समय इस थाने को दिया। यह वक्त कठिन दौर के शुरुआत का भी था जब कोरोना का संक्रमण काल भी शुरू हुआ था। थाना भवन छोटा होने के कारण यहां आने वाले फरियादियों व उनके साथ आने वाले ग्रामीणों के बैठने एवं प्रसाधन आदि की सुविधा का अभाव टीआई ने महसूस किया। इसमें सबसे बड़ी दिक्कत उन महिलाओं को होती उन्होंने देखी जो अपने दुधमुंहे बच्चों के साथ फरियाद लेकर अथवा फरियादी के साथ पहुंचती थीं। प्रसाधन से लेकर बच्चों को स्तनपान के लिए भी कोई सुरक्षित स्थान पूरे थाना परिसर में मौजूद नहीं था। बैठक व्यवस्था के अभाव के कारण आदिवासी अंचल से आने वाले फरियादियों और महिलाओं को इधर-उधर भटकने के साथ कई तरह की व्यवहारिक दिक्कतों के दौर से भी गुजारना पड़ता। गर्मी और बरसात के मौसम में खासकर समस्या से लोग दो-चार होते दिखे।

निरीक्षक लीलाधर राठौर

थाना प्रभारी ने थाना को व्यवस्थित करने के लिए परिसर में पड़े कबाड़ को एक किनारे करवाया और फिर परिसर में आगंतुक कक्ष तथा महिलाओं व शिशुवति महिलाओं के लिए एक पृथक संवेदना कक्ष के निर्माण की नींव रखी ताकि महिलाएं अपने शिशुओं को बेहिचक और सुरक्षित ढंग से स्तनपान करा सकें। बैठक की पर्याप्त व्यवस्था के साथ-साथ प्रसाधन की सुविधा युक्त भवन निर्माण के लिए लीलाधर राठौर ने शुरुआत की। नगर पंचायत पाली के अध्यक्ष उमेश चंद्रा (बंटू) से लेकर सरपंचों और जनप्रतिनिधियों सहित नगर के सेवाभावी लोगों ने अपने हाथ आगे बढ़ाए। नगर पंचायत अध्यक्ष व टीआई लीलाधर ने भवन निर्माण की नींव रखी। अच्छी नीयत से शुरू किए गए कार्य को लोगों का साथ मिला और भवन बनकर तैयार हो गया। यहां निर्माण, बिजली से लेकर टाइल्स लगाने तक का काम लीलाधर राठौर के कार्यकाल में हुआ। इसके बाद उनका तबादला दूसरे थाना कर दिया गया। नए थानेदार निरीक्षक पौरुष पुर्रे के अलावा एएसआई अश्वनी निरंकारी ने इस काम को आगे बढ़ाया और सुविधा युक्त सामान्य आगंतुक कक्ष व महिलाओं तथा शिशुवती माताओं के लिए पृथक भवन बनकर तैयार हो गया। थोड़ा बहुत शेष रह गए कार्य को वर्तमान टीआई अनिल पटेल ने पूरा किया। अब इस नए भवन को उद्घाटन का इंतजार है ताकि यह फरियादियों के लिए खोला जा सके। वैसे लीलाधर ने कुसमुंडा थाना में पदस्थ रहने के दौरान यहां भी खासा कायाकल्प कराया है।
0 और भी थानेदारों ने किए हैं अनुकरणीय कार्य

नए लुक में कोतवाली

अपनी-अपनी पदस्थापना के दौरान थानों को संवारने का काम अन्य चुनिंदा थानेदारों ने भी किया है जिसकी छाप फिलहाल अमिट है। सिटी कोतवाली में पदस्थ रहे निरीक्षक सुरेश ध्रुव,यदुमणि सिदार, विवेक शर्मा ने आंतरिक तो दुर्गेश शर्मा ने बाहरी परिसर को नया लुक दिया। कोतवाली में आगन्तुक कक्ष व पीछे महिला स्टाफ के लिए विश्राम गृह को विकसित कराया। सामने दीवारों पर आकर्षक और प्रेरक पेंटिंग से नया लुक दिया। बाल्को टीआई राकेश कुमार मिश्रा ने कबाड़ से घिरे बालमित्र थाना को नया आयाम दिया। यहां आने वाले फरियादियों के लिए सुविधा विकसित करने के साथ ही थाना परिसर को सुसज्जित कर जिला ही नहीं प्रदेश का पहला तंबाकू मुक्त थाना बनाया। यहां पृथक से महिला डेस्क कक्ष भी बनाया गया। आईजी रतनलाल डांगी ने वर्तमान एसपी भोजराम पटेल के साथ विगत वर्ष हुए निरीक्षण के दौरान कोतवाली और बाल्को थाना की सराहना भी की।

इसके अलावा कटघोरा, दर्री और उरगा थाना को भी यहां के थानेदारों ने सुविधा युक्त बनाने में अपना-अपना योगदान दिया। छोटे से भवन में संचालित होते रहे उरगा थाना को आज के स्वरूप में विकसित करने में तत्कालीन थाना प्रभारी एसआई लल्लन सिंह की सराहनीय भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। यहां के इंचार्ज रहे निरीक्षक विजय चेलक ने भी सुविधाओं को विकसित किया है। भले ही कार्य जनसहयोग के अलावा सरकारी और विभागीय मद से भी हुए हैं लेकिन पहल के लिए इन थानेदारों के कार्यकाल को जनता व स्टाफ की सराहना जरूर मिलती है। निःसन्देह इन्हें जिला पुलिस अधीक्षकों का भी मार्गदर्शन व सहयोग मिलता रहा।

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