तालाब के नाम पर खोद रहे टीला और पहाड़ी
कोरबा(खटपट न्यूज़)। कोरबा जिले में कलेक्टर और उनके निर्देश को बड़े ही सधे तरीके से गुमराह किया जा रहा है।पिछले दिनों मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश उपरांत कलेक्टर श्रीमती रानू साहू ने स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह के निर्माण कार्य में खासकर सरकारी निर्माण में चोरी के सामग्रियों का बिल्कुल भी उपयोग न किया जाए। विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे विशेष कर सड़क निर्माण के कार्य में चोरी के मिट्टी और मुरूम का अवैध तरीके से उपयोग किया जा रहा है। कहने को तो खनिज अमला इस पर कार्रवाई करता है लेकिन कार्रवाई का तौर तरीका यह बताने के लिए काफी है कि इसमें सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है।

करतला ब्लाक के ग्राम देवलापाठ में भी गुमराह करने की बात सामने आई है। निर्माण कार्य में लगी गावर कंस्ट्रक्शन लिमिटेड कैंप कोथारी के द्वारा यह कार्य किया जा रहा है। हालांकि उसने शासकीय तालाब का गहरीकरण से निकलने वाले मिट्टी /मुरूम के परिवहन की अनुमति खनिज विभाग से प्राप्त कर ली है लेकिन यह अनुमति तो एक दिखावा है बल्कि इसकी आड़ में दूसरे स्थान से बड़े पैमाने पर मिट्टी और मुरूम खोदकर अवैधानिक रूप से निर्माण कार्य में लगाया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि देवला पाठ के पहाड़ी रूपी लालमाटी टीला को खोदकर मुरूम और मिट्टी ले जाई जा रही है। गांव में स्थित 4 में से किसी तालाब गहरीकरण का कोई भी काम फिलहाल नहीं चल रहा है क्योंकि पानी भरा है। ऐसे में यह सवाल उठना जायज है कि जब तालाब का गहरीकरण नहीं हो रहा तो फिर आखिर किस मिट्टी और मुरूम का परिवहन किया जा रहा है? कंपनी को शासकीय तालाब गहरीकरण से निकलने वाले मिट्टी/मुरूम को ले जाने की अनुमति है जो 24 दिसंबर 2021 को जारी की गई है एवं समय अवधि 6 माह जून 2022 तक है। खोदने की तो अनुमति नहीं मिली है पर परिवहन अनुमति की आड़ में गैर लाइसेंसी काम धड़ल्ले से किया जा रहा है। परिवहन की एक रायल्टी पर कई वाहन ढोये जा रहे हैं। खनिज अमला इससे अनजान हो ऐसा तो संभव नहीं लेकिन खनिज संसाधन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग कोरबा जिले के प्रारंभिक से लेकर अंतिम छोर तक हो रहा है। कलेक्टर श्रीमती रानू साहू को गुमराह करने में उनका ही अधीनस्थ अमला जोर-शोर से लगा हुआ है। कार्यवाही होती है पर तौर-तरीका सही नहीं।कलेक्टर को अपने अमले पर विश्वास करना पड़ता है लेकिन इस विश्वास की आड़ में न जाने कितने बड़े पैमाने पर खनिज का दोहन करने की छूट अघोषित तौर पर दे दी गई है जिससे सरकार को लाखों-करोड़ों का राजस्व नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।

बता दें कि पिछले दिनों करतला ब्लॉक के ग्राम केरवाद्वारी में एक ट्रैक्टर और जेसीबी को जप्त किया एवं मौके से तीन खाली ट्रैक्टर भी जप्त किये गए लेकिन बड़े पैमाने पर खोद कर रखी गई मुरूम की जब्ती नहीं की गई। इस कार्रवाई के बाद दोबारा दबिश नहीं दी गई जबकि महज एक कार्रवाई की खानापूर्ति के बाद सैकड़ों ट्रैक्टर मुरुम खोदी जा चुकी है और अभी भी जारी है। यह मामला अभी कथित तौर पर जांच में है कि देवलापाठ में यह नजारा देखने को मिला।
पोड़ी-उपरोड़ा ब्लॉक में गेवरा रोड से पेंड्रा रोड के मध्य रेल कॉरिडोर बिछाने के काम में भी अवैध तौर पर मिट्टी/ मुरूम खोदकर उपयोग किया जा रहा है। शोर मचाने पर थोड़ी बहुत कार्यवाही तो होती है लेकिन उसके बाद फिर वही सिलसिला शुरू हो जाता है। जंगल,राजस्व की जमीन खोदने के साथ-साथ मनरेगा से निर्मित तालाब जिसका उद्देश्य ग्रामीण जनता को जल संबंधी राहत पहुंचाने का है, उसे भी खोदने के लिए दे दिया जाता है। निजी भूमि, कृषि भूमि को जैसा पाए वैसा खोदने की अनुमति प्राप्त कर ली जाती है। इससे जमीन का संतुलन कहीं न कहीं बिगड़ने के साथ-साथ अच्छा खासा राजस्व नुकसान भी हो रहा है। वर्तमान में लाभ के लिए बेतरतीब खुदाई आने वाले समय में किसी न किसी रूप में घातक परिणाम लाने वाला भी हो सकता है। इस ओर कलेक्टर को गंभीरता से काम करना होगा।
00 सत्या पाल 00 (7999281136)















