कोरबा(खटपट न्यूज़)। एसईसीएल की खदान में सैकड़ों की संख्या में लोगों के द्वारा कोयला चोरी का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद शासन- प्रशासन में हड़कंप मच गया है। कल बिलासपुर रेंज के आईजी रतनलाल डांगी ने कोयला चोरी के वायरल वीडियो पर संज्ञान लेते हुए बिंदुवार जानकारी के साथ जांच के आदेश बिलासपुर,रायगढ़ व कोरबा एसपी को प्रेषित किया है।

इधर वायरल वीडियो पर चौतरफा हल्ला मचने के बाद आज कलेक्टर श्रीमती रानू साहू और एसपी भोजरम पटेल ने गेवरा व दीपका खदान का निरीक्षण कर सुरक्षा उपयों का जायजा लिया। यहां खदानों की सुरक्षा व्यवस्था काफी सामान्य पाई गई। लिहाजा मौके पर ही जेसीबी वाहन को बुलवाया गया और खदान के चारों तरफ गड्ढा खुदवाने के साथ ही फेंसिंग के निर्देश कलेक्टर ने दिए । मीडिया से चर्चा के दौरान कलेक्टर के बताया कि जनवरी-फरवरी माह में एसईसीएल की बैठक लेकर अधिकारियों को खदानों की सुरक्षा को लेकर निर्देशित किया गया था, लेकिन अधिकारियों ने प्रशासन के निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया। कलेक्टर ने खदान के पास एक पोस्ट बनाने को कहा और निरीक्षक स्तर के अधिकारी की मौजूदगी 24 घंटे रखने के आदेश दिए हैं।

दूसरी तरफ इस वायरल वीडियो को लेकर लोगों में अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। यह वीडियो किस खदान का है, यह भी पुलिस व प्रशासन के द्वारा स्पष्ट नहीं किया जा सका है। हालांकि आईजी रतनलाल डांगी के द्वारा जांच का आदेश दिए जाने के बाद कोरबा एसपी भोजराम पटेल ने खदान क्षेत्र में आने वाले दीपका थाना और हरदी बाजार पुलिस चौकी के प्रभारी को लाइन अटैच कर दिया है। यह कार्रवाई उन्होंने प्रशासनिक दृष्टिकोण से किया जाना बताया है लेकिन लाइन अटैच करने को लेकर महकमे के साथ-साथ शहर में भी चर्चा गर्म है। चर्चा है कि अभी जबकि आईजी ने जांच के आदेश दिए हैं और जांच शुरू भी नहीं हो पाई है कि इन दोनों प्रभारियों को हटा दिया गया तो इसकी वजह क्या है? जांच पूर्ण हो जाने के बाद तथ्यों के गुण-दोष के आधार पर मिले निर्देशों के उपरांत कार्यवाही होने का अंदेशा लोगों ने जताया था,और यह सही भी होता किंतु इस तरह की गई कार्रवाई से यह चर्चा गर्म है कि क्या जांच से पहले ही इन दोनों निरीक्षकों को दोषी मान लिया गया है? क्या इनके पदस्थ रहने से जांच प्रभावित होने का खतरा था? क्या खदान में घुस कर ग्रामीणों के द्वारा किए जा रहे कोयला चोरी के मामले में इन दोनों निरीक्षकों को बलि का बकरा बनाया गया है? पुलिस ने इस पूरे मामले में एसईसीएल स्तर पर और सीआईएसएफ के अधिकारियों की अनदेखी पर क्या जिम्मेदारी तय की है जिनके ऊपर करोड़ों का बजट खर्च होता है और उन पर कोई एक्शन क्यों नहीं लिया गया है? क्या जिला पुलिस इन दोनों निरीक्षकों पर पूरा ठीकरा फोड़ने का मन बना चुकी है या फिर जांच में एसईसीएल के अधिकारियों, सीआईएसएफ व अन्य सुरक्षा कंपनियों के अधिकारियों की भूमिका भी तय होगी कि आखिर उन्होंने अपने खदान से होने वाली कोयला चोरी को जानकर भी रोकने के लिए कोई कदम क्यों नहीं उठाया? जबकि कलेक्टर ने पूर्व की बैठक में स्पष्ट किया था कि खदानों की सुरक्षा का दायित्व एसईसीएल और उसकी सुरक्षा कंपनियों का है किंतु इनके द्वारा कलेक्टर के निर्देशों की भी अवहेलना की गई।
वैसे यह भी हास्यास्पद होने के साथ-साथ सोचने का विषय है कि कोयला चोरी को लेकर तरह-तरह के वीडियो और फोटो सोशल मीडिया में लंबे समय से वायरल होते आ रहे हैं जिन पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने कभी कोई संज्ञान नहीं लिया। कई मौकों पर इस ओर इशारा होता रहा लेकिन एसईसीएल प्रबंधन से लेकर शासन-प्रशासन का खुफिया तंत्र भी खामोश रहा? क्या क्षेत्र के जनप्रतिनिधि इस पूरे वाकये से अनजान थे या फिर उनके अपने लोग भी कोयले के काले कारोबार में अपने हाथ काला करते रहे? अब जब यह वीडियो वायरल हुआ तो जांच का आदेश के बाद बयानबाजी का दौर भी शुरू हो गया है। जांच पूरी होने और किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले ही लोग अपनी-अपनी तरह से आशंकाओं पर सवाल दागने लगे हैं। बता दें कि कोरबा जिले में सिर्फ कोयला चोरी ही नहीं बल्कि और भी बहुत कुछ विधि के विरुद्ध हो रहा है जो खुली आंखों से देख कर भी प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों के द्वारा अनदेखा किया जा रहा है जबकि इनकी तस्वीरें और वीडियो भी सोशल मीडिया पर खबरों के साथ वायरल की जा चुकी हैं।















