
एक कार्यवाही के वक्त का फाइल फोटो
कोरबा,(खटपट न्यूज़)। जिले के कोयलांचल और सीमांचल में कुछ दिन ठहरने के बाद एक बार फिर जुआ की महफ़िल लॉक डाउन में पूरे शबाब पर है। हाल-फिलहाल सत्ता पक्ष के कुछ पार्षद और एक विधायक के एक प्रतिनिधि नेताजी अपने -अपने इलाके में जुआरियों के साथ जुगलबन्दी किये हुए हैं। वैसे तो पार्षद और नेताजी का यह फड़ पूरे शबाब पर था लेकिन कुछ तकनीकी खामियों की वजह से कुछ वक्त के लिए रुकावट आई। सत्ता पक्ष से जुड़े होने का फायदा मिला व मामला सेट होने के बाद फिर से सारा कुछ मन माफिक चल रहा है। पार्षद की सरपरस्ती में कोयलांचल और नेताजी के संरक्षण व ‘एम’ अक्षर वाले साथी के पार्टनरशिप में सीमांचल में रोजाना फड़ सज रहे हैं। एक का ठिकाना जंगल के बीच तो दूसरे के लिए अपने कई सुरक्षित ठिकाने हैं। 500 से 1000 रुपये एंट्री फीस के साथ कोरबा ही नहीं वरन इन फड़ों में सीमावर्ती जिले से भी बावन परियों के प्रेमी किस्मत आजमाने पहुंच रहे हैं। यह बात और है कि लॉक डाउन की सख्ती इन पर लागू नहीं होती और शायद इनसे संक्रमण का खतरा भी नहीं है। कभी-कभार कुछ हजार के जुए पकड़े भी जाते हैं ताकि इन नेताजी व पार्षद के काम भी चलते रहें व पब्लिक को भी लगे कि कुछ तो काम सामाजिक बुराई की रोकथाम के लिए हो रहे हैं। इनके पास आय के ठीक-ठाक साधन भी हैं, जनता ने चुनकर जिताया भी और संगठन ने भी पद से नवाजा है पर सत्ता में रहते-रहते पैसे की भूख मिटाने जनहित छोड़कर स्वहित में दाएं-बाएं रास्ते पर ये पार्षद व नेताजी चल पड़े हैं। कानों कान खबर है कि नेताजी को उनके सरपरस्त का संरक्षण भी मिला हुआ है और वे जान कर भी इस ओर से आंखें मूंदे बैठे हैं। इनके करीबी तो दावे के साथ बताते हैं कि ऊपर तक 5-6 पेटी देकर काम को रफ्तार दिए रहो, बाकी तो सम्हालने वाले इशारों-इशारों में काम कर ही रहे हैं। अब ये ऊपर वाला और पेटी लेने-देने वाला कौन है, यह तो दोनों ही जानें पर इतना तय है कि आने वाले दीपावली पर्व के लिए मामला अभी से धीरे-धीरे सेट होने लगा है। यह त्यौहार ताश प्रेमियों के लिए चरम होगा जो इस अवसर पर जुआ खेलने को परंपरागत तौर पर शुभ मानते हैं। बाकी तो पब्लिक सब जानती ही है..…
0 सटोरिये भी सक्रिय, चलता-फिरता बाजार गर्म
कोरोना की आपदा में सट्टेबाज गैंग भी अवसर तलाश चुका है। आईपीएल क्रिकेट मैच में रोज हजारों- लाखों रुपए के दांव लग रहे हैं। सटोरिये मोबाइल के जरिए चलते-फिरते अपना काम कर जा रहे हैँ और जिनके ठिकाने हैँ, वो भूमिगत होकर अपना खेल कर रहे हैं। स्थाई ठिकाना पुलिस और उसके तंत्र तलाश नहीं पा रहे हैं जबकि पुराने सटोरिये अपना काम कर ही रहे हैं।














