
कोरबा(खटपट न्यूज़)। जिले के कुदमुरा-श्यांग आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में आजादी के74 वर्ष बीत जाने के बाद भी शासकीय महाविद्यालय नहीं खुल सका है। इससे आदिवासी बाहुल क्षेत्र में शिक्षा के विकास को एक नया आयाम नहीं मिला है। ऐसा लगता है कि इन शिक्षण संस्थाओं का लाभ इस क्षेत्र के आदिवासी युवा एवं युवतियों को नहीं मिलेगा, जिससे वे अपने पिछडेपन को दूर नहीं कर सकेंगे तथा नई प्रतिभाओं को आगे बढने के लिए न कोई रास्ता प्रशस्त होगा। युवा-युवती उच्च स्तर की शिक्षा ग्रहण करने के लिए गांव से काफी दूर सरकारी- निजी महाविद्यालयों में या गांव से निकट पड़ने वाले अन्य शहरों में संचालित महाविद्यालय में प्रवेश के लिये जाना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में गरीब तबके के युवा- युवती के लिए शासकीय महाविद्यालय के अभाव में अधिकांश छात्रों को उच्च स्तर की शिक्षा बीच में ही छोड़ने को मजबूर होना पड़ता है। राजनैतिक पार्टी भी इस ओर ध्यान नही दे रहे और न ही कोई ठोस प्रयास करता दिखाई दे रहा है। चुनाव में जरूर महाविद्यालय खोलने का मुद्दा उठाया जाता है,परन्तु वक्त के साथ इसे भुला भी दिया जाता है। आदिवासी बाहुल्य कुदमुरा – श्यांग क्षेत्र में महाविद्यालय खुल जाए यह हर युवा युवतियो की मांग है,किंतु महाविद्यालय नहीं होने से क्षेत्र के युवक-युवतियों को उच्च अध्ययन के लिये अन्यत्र जाना मजबूरी है।
0 महाविद्यालय खुलने से 40 गांव को मिलेगा उच्च शिक्षा का लााभ
कुदमुरा-श्यांग क्षेत्र ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ आदिवासी परिवार निवासरत हैं। क्षेत्र में महाविद्यालय खुलने से शहर अथवा अन्य स्थानों पर पढ़ने के लिए कई किलोमीटर दूर नहीं जाना पड़ेगा। आदिवासी बाहुल क्षेत्र में शिक्षा के विकास को एक नया आयाम मिलेगा। उच्च शिक्षा का लाभ क्षेत्र के आदिवासी युवा एवं युवतियों को मिलेगा जिससे वे अपने पिछडेपन को दूर कर सकेंगे। साथ ही इसका लाभ निकटस्थ सीमावर्ती रायगढ़ जिले के 20 गांवों के छात्रों को भी मिल सकेगा।















