Sunday, March 22, 2026
Home कोरबा कमिश्नर की फटकार-कलेक्टर की नोटिस,क्या सुधरेगी राजस्व की अव्यवस्था?

कमिश्नर की फटकार-कलेक्टर की नोटिस,क्या सुधरेगी राजस्व की अव्यवस्था?


0 पटवारियों के विरुद्ध शिकायतों का नहीं हुआ है निराकरण
कोरबा (खटपट न्यूज)। कोरबा जिले में राजस्व विभाग के कामकाज को लेकर शिकायतें अक्सर सामने आती रही हैं। इन शिकायतों के प्रकाश में समय-समय पर होने वाली बैठकों में दिए जाने वाले निर्देश के बाद भी राजस्व प्रकरणों का निराकरण में अरुचि कहीं न कहीं शासन की मंशा और उच्च अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना जैसा ही है। कलेक्टर श्रीमती रानू साहू की पहल पर तुंहर सरकार-तुंहर द्वार समाधान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शिविर में राजस्व संबंधी मामलों की संख्या सर्वाधिक दर्ज हुई है जिनका मौके पर निराकरण किया गया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हल्का स्तर पर राजस्व के प्रकरण किस रफ्तार से निराकृत हो रहे हैं। यह कोई एक गांव की बात नहीं बल्कि लगभग पूरे जिले की बात है।

फाईल फोटो

जमीन संबंधी समस्याओं और कार्यों के मामले में पटवारी को लोग भगवान का दर्जा तक देते हैं और उम्मीद करते हैं कि इनकी दहलीज पर चढ़ने के बाद समाधान हो जाएगा। कुछ एक पटवारियों को छोड़ दें तो अधिकांश लोगों की शिकायतें सामने आती ही हैं। इनकी मनमानी के कारण जमीन-जायदाद खासकर खेतों में कब्जा जैसे मामलों का भी निराकरण वर्षों तक लटका रहता है और लोग एक-दूसरे के खून के प्यासे तक हो जाते हैं। पिछले दिनों बिलासपुर संभाग के कमिश्नर डॉ. संजय अलंग ने खुद गड़बड़ी पकड़ी जिसमें 5 साल से 1 प्रकरण में आदेश सिर्फ इसलिए लटका है क्योंकि पटवारी का प्रतिवेदन नहीं मिला है। बुधवार को कलेक्टर श्रीमती रानू साहू ने बरपाली तहसील का निरीक्षण किया तो उन्होंने भी 10 से अधिक पेशी होने के बाद भी पटवारी का प्रतिवेदन नहीं मिलने के कारण राजस्व मामले का निराकरण नहीं होना पाया। ये दोनों मामले यह बताने के लिए काफी हैं कि पटवारी किस तरह मनमानी कर रहे हैं।
हाल-फिलहाल बरपाली तहसील के ही 3 पटवारियों की शिकायत कलेक्टर जनदर्शन में हुई है। एक पटवारी पर चौहद्दी बनाने के नाम पर 15 हजार रुपए मांगने का आरोप लगा है तो एक अन्य पटवारी पर मृत मवेशी का मुआवजा प्रकरण बनाने के लिए 20 हजार रुपए मांगने का आरोप ग्रामीण ने लगाया है। ग्राम उरगा के किसानों ने तत्कालिन पटवारी पर जमीनों की हेर-फेर का गंभीर आरोप लगाया है जिसके कारण मुआवजा का लाभ प्रभावित हो रहा है। ऐसे और भी कई शिकायत लंबित हैं जो दूसरे क्षेत्रों की हैं।
0 मुख्यालय में निवास से निरंतर दूरी
शिकायत रही है कि पटवारी अपने मुख्यालय में नहीं रहते। इन शिकायतों का निवारण आज पर्यंत नहीं हो सका है। अब जबकि कमिश्नर डॉ. संजय अलंग ने 25 मार्च 2022 को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पटवारियों का उनके मुख्यालय में निवास सुनिश्चित किया जाए, तब अनुविभागीय अधिकारियों (एसडीएम) द्वारा इसका पालन कराना अहम जिम्मेदारी बनती है किन्तु निर्देश के 5 दिन बाद भी इस पर अमल नहीं हुआ और न ही अनुविभाग स्तर पर निर्देश जारी किए जा सके हैं। न सिर्फ बरपाली तहसील बल्कि जिले के अंतिम छोर तक के हल्का की यही हालत है। पटवारियों के मुख्यालय में निवास की बात कही जाए तो एसडीएम सर्कुलर पढ़ाने की बात कहते हैं। देखना है कि कमिश्नर की फटकार व कलेक्टर की नोटिस के बाद राजस्व महकमे की अव्यवस्थाओं में सुधार कब तक आएगा? वे पटवारी निश्चित ही साधुवाद के पात्र हैं जो अपने कर्तव्यों का जनहित में निर्वहन करते हुए कोई अतिरिक्त लालसा नहीं रखते किन्तु इससे दीगर मंशा रखने वाले पटवारी सदैव दण्ड के भागीदार हैं। कलेक्टर ने रिश्वतखोर लोगों की शिकायत के लिए नंबर 94061- 33440 भी जारी कर दिया है जिसका पूरा लाभ आमजन को उठाना ही चाहिए।
0 सुधार के बदले दबाव की रणनीति
बहुतेरे पटवारियों की दफ्तर में मौजूदगी काफी कम मिलती है। नहीं मिलने पर कारण जिला मुख्यालय जाना, एसडीएम द्वारा बुलाया जाना, सीमांकन में जाना, अवकाश पर होना आदि बताया जाता है। इनके अनुपस्थिति में पटवारी दफ्तर में ताला लटका रहता है। कोटवारों को इन पटवारियों से संबद्ध किया गया है लेकिन जब पटवारी ही अपने मुख्यालय में नहीं रहेंगे तो कोटवार क्या करेगा? हल्का मुख्यालय से काफी दूर-दूर से आना-जाना करने वाले पटवारियों के आने पर अनिश्चितता के बादल भी छाए रहते हैं तब फरियादियों के लिए काफी दिक्कत होती है। इससे भी बड़ी बात यह है कि पटवारियों की गड़बड़ी सामने लाई जाए तो सुधार के बदले दबाव की रणनीति अपनाई जाती है। एक ग्रामीण पत्रकार को तो एससी-एसटी एक्ट में फंसा देने की धमकी तक महिला पटवारी द्वारा दी जा चुकी है। इतना ही नहीं अधिकारी भी इन्हें संरक्षण देते हुए कहते हैं कि इन्होंने अगर काम करना बंद कर दिया तो सोचो क्या होगा? लेकिन यह क्यों भूल जाते हैं कि चुनिंदा पटवारियों की गलती या सांठगांठ से जानबूझकर की जाने वाली हेराफेरी के कारण अनेक- अनेक लोग जिंदगी भर कोर्ट-कचहरी का चक्कर काटते रह जाते हैं।
00 सत्या पाल 00 (7999281136)

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