कोरबा-कटघोरा, (खटपट न्यूज)। कटघोरा वनमंडल के रेंजों में जारी निर्माण कार्यों में घटिया सीमेंट का उपयोग बदस्तूर जारी है। विश्वसनीय विभागीय सूत्रों के मुताबिक सीमेंट आपूर्ति का टेंडर उठाने वाले ठेकेदार श्रीनिवास राव जो कि कैम्पा मद का काम देख रहे शीर्ष अधिकारी के रिश्तेदार बताए जाते हैं, उनके द्वारा हाई-टेक के बाद अब सुपर पावर नाम के सीमेंट की सप्लाई शुरू कर दी गई है। ठेकेदार न सिर्फ सीमेंट की आपूर्ति कर रहे हैं बल्कि कटघोरा वन मंडल में 20-30 स्टॉप डेम का निर्माण भी करा रहे हैं।

बता दें कि हमने पिछले दिनों घटिया सीमेंट की आपूर्ति व इससे हो रहे गुणवत्ताहीन निर्माण को प्रमुखता से उजागर किया। इसके बाद आनन-फानन में सीमेंट का उठाव कर बिरला गोल्ड व एसीसी सीमेंट की आपूर्ति की कवायद विभागीय अधिकारियों की सांठ-गांठ से ठेकेदार ने शुरू की। सरकारी काम और सरकार के धन के साथ धोखाधड़ी करने वाले ठेकेदार पर रिकवरी/ब्लैक लिस्ट/ठेका निरस्ती की कार्यवाही की उम्मीद तो थी ही नहीं, पर यह राहत भरा था कि अच्छे सीमेंट से निर्माण कार्य अब होंगे। विश्वसनीय सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि ठेकेदार ने मात्र जटगा रेंज से ही घटिया हाई-टेक सीमेंट का उठाव कराया। यहां 1500 बोरी सीमेंट की आपूर्ति की थी, जिसमें से 500 बोरी का उठाव करा लिया गया जबकि करीब 1000 बोरियों का उठाव बाकी है। इसकी जगह एसीसी व बिरला गोल्ड सीमेंट यहां डम्प करवाए गए हैं।

दूसरी ओर वन मंडल के कटघोरा, कसनिया काष्ठागार, पसान, केंदई, ऐतमा नगर, पाली, चैतमा रेंज में भी निर्माण व मरम्मत संबंधी कार्य हो रहे हैं जिनमें हाई-टेक सीमेंट की आपूर्ति की गई है। रेंजरों ने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया है कि जो सामान भेजे जा रहे हैं, उन्हीं से निर्माण कराना है। हाई-टेक सीमेंट आपूर्ति की बात कहते ही चतुर-सुजान रेंजरों ने फोन काट दिया। इधर कार्यवाही का अभाव और शीर्ष अधिकारी से रिश्तेदारी के कारण ठेकेदार का मनोबल इतना बढ़ा हुआ है कि उसके द्वारा हाई-टेक सीमेंट के साथ-साथ अब सुपर पावर सीमेंट की आपूर्ति निर्माण स्थलों पर की जा रही है। इन रेंजों से घटिया सीमेंट वापस नहीं मंगाए गए और धांधली जारी है। सूत्र बताते हैं कि सरकारी निर्माण कार्यों में इस तरह के सीमेंट का उपयोग बिल्कुल भी नहीं किया जाता, लेकिन कटघोरा एक ऐसा वन मंडल है जहां यह काम बदस्तूर बिना किसी रोक-टोक के हो रहा है तब निर्माण कार्य के टिकाऊपन पर कितना भरोसा किया जा सकता है?
















