Sunday, March 22, 2026
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एसपी से शिकायत के दो साल बाद भी राहत नहीं, दहेज प्रताड़ित पत्नी को धोखे से मायके छोड़कर लेने नहीं आया पति…सही है बहुत यातनाएं..

0 अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य मानवाधिकार, राज्य महिला आयोग, पुलिस महानिरीक्षक को लिखा पत्र, एसपी को पुनः स्मरण कराया

कोरबा(खटपट न्यूज़)। कोतवाली थाना क्षेत्रांतर्गत न्यू रेलवे कालोनी निवासी श्रीमती लखी राजपूत ने दो साल पहले कोरबा पुलिस अधीक्षक को लिखित आवेदन कर पति योगेश सिंह राजपूत सहित ससुरालियों पर दहेज के नाम पर शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना, क्रूरता, दुर्व्यवहार, गाली-गलौच तथा पति द्वारा झूठ बोलकर, धोखा देकर उसे कोरबा में छोड़ने की शिकायत दर्ज कराई है। इस मामले में शिकायत दिनांक 03 जून 2019 को किये जाने और पुलिस महानिरीक्षक को करीब 3 माह पहले ही अवगत कराने के बावजूद कोई राहत नहीं मिल सकी है। पीड़िता ने अब 17 जून 2021 को पुनः पत्र लिखा है। अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य मानवाधिकार, राज्य महिला आयोग, पुलिस महानिरीक्षक को पत्र लिखने के साथ-साथ कोरबा एसपी को पुनः स्मरण कराया है।

प्रतीकात्मक चित्र

पीड़िता लखी राजपूत ने बताया कि उसका विवाह 30 अप्रैल 2016 को हिन्दी रीति-रिवाज के साथ कोरबा में हुआ था। शादी के बाद से ही पति के साथ उसकी सास श्रीमती उमा देवी, ननंद नीता थापा जो विवाह के पश्चात भी अपने मायके में ही रहती है। पति की मौसी श्रीमती प्रेमलता राणा जो वडोदरा में ही रहती है, बार-बार आवेदिका के पति के घर में आती रहती है। देवर देवेन्द्र सिंग राजपूत, पति का मामा रूप सिंह भंडारी आवेदिका को, तुम बोझ हो, बच्चा पैदा नहीं कर सकती, कम दहेज लाई हो, अपने मायके से रुपए लाकर दो, स्टाम्प में लिखकर दो आदि कहकर दुर्व्यवहार करते हुए गंदी-गंदी गाली देकर, मारपीट कर अपमानित करते थे व किसी तांत्रिक की लाई मिठाई, लौंग-इलायची को यह कहकर जबरदस्ती खिलाते थे कि आवेदिका को जादू-टोना हो गया है जिससे आवेदिका की तबियत खराब होती थी और आवेदिका को अत्यंत मानसिक, शारीरिक पीड़ा से पीड़ित होना पड़ता था। आवेदिका अपने ससुराल में घर के सभी कार्य करती थी, खाना बनाती थी किंतु आवेदिका को खाना नहीं दिया जाता था।
आवेदिका के पति, सास, ननंद, मौसी सास, मामा ससुर, देवर कहते थे कि हम योगेश सिंह की दूसरी शादी कर देंगे कह कर आवेदिका को हमेशा प्रताड़ित करते थे। तलाक की धमकी भी देते थे। देवर देवेन्द्र सिंह राजपूत आवेदिका के अकेले होने की स्थिति में उससे अश्लील हरकते करता था। उसके बेडरूम में सो जाता था जिसकी आपत्ति आवेदिका करती थी व अपने पति को बताती थी जिसके उपरांत भी आवेदिका का पति उसे अनसुना कर देता था। शादी के समय आवेदिका श्रीमती लखी राजपूत ने उसके पति व पति के परिवार वालों की मांग पर 2 लाख रुपए नगद दहेज दिया था। शादी के समय सोने के जेवरात, हार, कान के तीन जोड़ी झुमके, तीन जोड़ी पायल, कांसे के बर्तन, कपड़े, उपहार सामग्री आदि दिए थे। इसके बावजूद शादी के बाद से दहेज के नाम पर प्रताड़ित किया जा रहा है। आवेदिका का ससुराल गृहग्राम वडोदरा में रहते हुए 4-5 माह का गर्भपात होने के समय वंदना अस्पताल में रहने के दौरान आवेदिका को अकेला छोड़कर उसका पति व पति के परिवार वाले घर चले जाते थे व आवेदिका की कोई देखभाल नहीं करते थे।
14-15 फरवरी 2019 ो आवेदिका का पथरी के ईलाज हेतु स्पनंदन अस्पताल वडोदरा में भर्ती होने के उपरांत डॉ. अमित पांचाल के द्वारा ऑपरेशन करने की सलाह दी गई किंतु आवेदिका का पति व उसके परिवार वालों द्वारा आवेदिका का कोई ईलाज नहीं कराया। ऑपरेशन का खर्च हम नहीं उठाएंगे कहा गया। 20 फरवरी 2019 को उसका पति झूठ बोकर छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में जरूरी काम है कहकर दोनों साथ चलते है कहकर पति ने आवेदिका को कोरबा छोड़ दूंगा और 2 दिन बाद रायगढ़ से वापसी होते समय अपने साथ वडोदरा ले आउंगा कहकर आज तक आवेदिका का पति लेने नहीं आया। पीड़िता ने 3 जून 2019 को पूरे घटनाक्रम की शिकायत कोरबा पुलिस अधीक्षक से लिखित में करते हुए उचित कार्यवाही का आग्रह किया था लेकिन दो साल बाद भी नतीजा शून्य है।
पीड़िता की ओर से पुनः स्मरण आवेदन 02 मार्च 2021 को बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक के नाम प्रेषित किया गया किन्तु कोई एफआईआर/कार्यवाही नहीं होने से इनके हौसले बुलंद हैं और पीड़िता भटक रही है।पीड़िता ने अब 17 जून 2021 को पुनः पत्र लिखा है। अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य मानवाधिकार, राज्य महिला आयोग, पुलिस महानिरीक्षक को पत्र लिखने के साथ-साथ कोरबा एसपी को पुनः स्मरण कराया है। देखना है कि उसे कब तक और किस हद तक राहत मिल पाती है और प्रताडकों पर क्या कार्यवाही होती है।

00 सत्या पाल 00 (7999281136)

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