Tuesday, September 22, 2026
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उजाड़ गौठान निरीक्षण से पहले गुलजार,सीईओ सीमा पात्रे ने देखी व्यवस्थाएं

0 व्यवस्था बनाने की हड़बड़ी में गड़बड़ी करना नहीं भूली गौठान समिति

निरीक्षण करती जनपद सीईओ

कोरबा (खटपट न्यूज)। मैदानी स्तर पर अधिकारियों के निरीक्षण का काफी असर पड़ता है। इसका ताजा उदाहरण करतला जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम पंचायत पठियापाली के दो गौठानों में देखने को मिला। 10 सितंबर तक की स्थिति में उजाड़ और खाली-खाली नजर आने वाले इन दोनों गौठानों की सूरत 15-16 सितंबर के मध्य काफी निखर गई। जनपद सीईओ ने यहां का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को सराहा लेकिन हड़बड़ी में गड़बड़ी की कहावत फिर भी चरितार्थ हो ही गई।

निरीक्षण से एक सप्ताह पहले की हकीकत(फोटो 10 सितम्बर 2022)

दरअसल करतला विकासखंड के ग्राम पंचायत पठियापाली में मां मड़वारानी स्वसहायता समूह द्वारा गौठान का संचालन किया जा रहा है। इसी तरह आश्रित ग्राम धमनागुड़ी में भी गौठान का निर्माण कराया गया है। इन दोनों गौठानों से न सिर्फ गाय व अन्य मवेशी नदारद दिखे बल्कि वर्मी कम्पोस्ट टांका में न तो गोबर और न ही केंचुआ खाद नजर आया। शौचालय में दरवाजा तक नहीं लगाया गया और न ही खरीदी-बिक्री वाले गोबर नजर आए और न ही मवेशियों के लिए चारागाह दिखा। 10 सितंबर तक यहां के हालात बिल्कुल उजाड़ की तरह थे। जनपद में सीईओ एमएस नागेश के चिकित्सा अवकाश पर चले जाने उपरांत सीमा पात्रे को प्रभार सौंपा गया।

निरीक्षण के लिए तैयार गौठान

शासन-प्रशासन की मंशानुरूप एवं कलेक्टर संजीव कुमार झा के द्वारा गौठानों में सक्रियता बढ़ाने के निर्देश के पालन में सीईओ सीमा पात्रे का 16 सितंबर को ग्राम पंचायत पठियापाली के गौठान में निरीक्षण निर्धारित हुआ। सीईओ के आने से पहले आनन-फानन में गौठान समिति के द्वारा यहां के हालातों को पूरी तरह बदलकर चकाचक कर दिया गया।

शौचालय में दरवाजे लगा दिए गए, वर्मी कम्पोस्ट टांका लबालब भर दिया गया। गोबर खरीदी भी बताई गई और सभी तरह की व्यवस्थाओं को बिल्कुल मूर्त रूप दिया गया।

गौठान समिति व स्व सहायता वमूह की बैठक लेते हुए सीईओ


0 टंकी में ढक्कन लगाना भूल गए,क्योंकि पीछे है

गौठान समिति के द्वारा व्यवस्थाओं को दुरुस्त तो किया गया लेकिन हड़बड़ी में गड़बड़ी कुछ ऐसी हुई कि शौचालय के सामने दरवाजा तो लगा दिया पर पीछे सेप्टिक टैंक के ऊपर ढक्कन लगाना भूल गए। यह दोनों ही गौठानों में हुआ जो एक संयोग नहीं बल्कि लापरवाही को प्रदर्शित करता है। अब सवाल यह है कि सीईओ को दिखाने के लिए आनन-फानन में की गई व्यवस्थाएं और सब कुछ ठीक-ठाक दिखाने का प्रयास आगे भी इसी तरह रहेगा या फिर दोनों गौठान पुन: उजाड़पन की ओर अग्रसर होंगे। वैसे बता दें कि इन दोनों गौठान से 16 सितंबर निरीक्षण तिथि से पहले न तो वर्मी कम्पोस्ट/केंचुआ खाद या गोबर खाद का निर्माण हुआ और न ही महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत गोबर की खरीदी की गई।

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