अहम फैसला : विक्रय अनुमति का अधिकार सिर्फ कलेक्टर को, रेवेन्यू बोर्ड या अन्य को भी नहीं….

0 रेवेन्यू बोर्ड की विक्रय अनुमति को हाईकोर्ट ने किया अमान्य

कोरबा/बिलासपुर(खटपट न्यूज़)। उच्च न्यायालय ने कहा है कि भूमि विक्रय की अनुमति देने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ कलेक्टर को है न कि राजस्व परिषद को। जमीन बिक्री के लिए राजस्व परिषद द्वारा दी गई अनुमति व रजिस्ट्री के जारी निर्देश को अमान्य करने के साथ ही पंजीयन आदेश को अपास्त किया गया है। राजस्व के मामलों में यह फैसला काफी महत्वपूर्ण है जिसका प्रचार-प्रसार करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

न्यायालयीन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पवन चौहान की रायगढ़ जिले के ग्राम बड़े अतरमुड़ा पटवारी हल्का नंबर 13 में स्थित भूमि 0.817 हेक्टेयर के क्रय हेतु 5 जून 2010 को 6 लोगों के साथ विक्रय करार किया गया। पवन चौहान ने राजस्व परिषद के समक्ष छग भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 8 के अधीन आवेदन किया कि कलेक्टर की छूट के बिना भूमि का विक्रय कर सकते हैं और भूमि का विक्रय करने के लिए कलेक्टर द्वारा अधिरोपित निर्बंधन भी अविधिक है। इसलिए कलेक्टर द्वारा अधिरोपित वर्जन में छूट प्रदान करते हुए भूमि विक्रय की अनुमति प्रदान की जाए। राज्य तथा तहसीलदार को उक्त आवेदन में यथाअभियोजित राज्य तथा तहसीलदार को नोटिस के बिना सीधे ही 8 अक्टूबर 2010 को संहिता की धारा 165 (6) एवं (7) के अधीन पवन चौहान के पक्ष में भूमि विक्रय की अनुमति प्रदान कर 7 जुलाई 2006 को कलेक्टर द्वारा अधिरोपित वर्जन में छूट प्रदान करते हुए आवेदन को अनुज्ञात (स्वीकार) कर 22 सूत्रीय सूचना प्रदान करने का भी निर्देश किया और भूमि के पंजीयन के लिए उप रजिस्टार को निर्देश दिया गया।
रेवेन्यू बोर्ड के इस आदेश से व्यथित होकर छत्तीसगढ़ राज्य एवं अन्य के द्वारा उच्च न्यायालय बिलासपुर में रिट याचिका दायर की गई थी।

0 राजस्व परिषद राजस्व अधिकारी नहीं बल्कि राजस्व न्यायालय प्रकरण के पूर्ण विचारण में न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद एवं विभिन्न न्याय दृष्टांतों के आधार पर व उच्चतम न्यायालय के स्पष्ट कथनानुसार कि-जहां किसी चीज को किसी निश्चित तरीके से करने की शक्ति प्रदान की जाती है तो उसे उसी तरीके से किया जाना चाहिए, अन्यथा बिल्कुल नहीं। विक्रय अनुमति प्रदान करने के लिए कलेक्टर को अधिकारिता प्रदान की गई है इसलिए कलेक्टर द्वारा भी प्रयोग किया जाना है, न तो कलेक्टर से उच्च प्राधिकारी और न ही राजस्व परिषद समेत अन्य कोई भी प्राधिकारी उस शक्ति का प्रयोग कर सकता है। राजस्व परिषद राजस्व अधिकारी नहीं बल्कि वह राजस्व न्यायालय है। न तो राजस्व परिषद न ही राजस्व परिषद का कोई भी सदस्य राजस्व अधिकारी है। परिषद केवल राजस्व न्यायालय होने के कारण अपनी अपीलीय तथा पुनरीक्षण पर सुनवाई कर निर्देशित कर सकता है।

0 जो अधिकार नहीं, उसका प्रयोग किया
न्यायमूर्ति ने कहा कि राजस्व परिषद ने ऐसे अधिकार का प्रयोग किया जो उसमें निहित नहीं है। उसने अनुमति प्रदान कर, अधिरोपित वर्जन को समाप्त कर सक्षम प्राधिकारी को 22 सूत्रीय सूचना प्रदान करने के लिए निर्देशित कर उप रजिस्टार को विक्रय विलेख पंजीकृत करने का निर्देश कर अपने प्राधिकार का उल्लंघन किया है। इस तरह राजस्व परिषद द्वारा पारित आदेश व इसके परिणामस्वरूप विक्रय विलेख के पंजीकरण को भी अमान्य किया गया। साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्य सचिव, प्रधान सचिव (राजस्व) एवं राजस्व परिषद को उक्त आदेश को कार्यवाही हेतु प्रेषित करने के भी निर्देश दिए हंै।

0 अधिवक्ता अग्रवाल कोरबा कलेक्टर का कराया ध्यानाकर्षण
कोरबा जिले में भी अनेक भू-माफियाओं के अलावा ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने डायवर्टेड भूमि के विक्रय की अनुमति कलेक्टर से लेना जरूरी नहीं समझा और सीधे रेवेन्यू बोर्ड में जाकर संहिता की धारा 8 के हवाले से अनुमति प्राप्त कर ली है जो उपरोक्त आदेश के प्रकाश में पूर्णत: अवैधानिक है। उक्त संबंध में कोरबा जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष एलएन अग्रवाल ने विगत दिनों कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल का भी ध्यानाकर्षण कराया है ताकि जिले में इस तरह के अवैधानिक अनुमति संबंधी कार्य पर संज्ञान लिया जा सके।

Advertisement Carousel