अब नहीं तो कब संभलेंगे… सिर पर मौत बनकर नाच रहा कोरोना, शवों को रखने व जलाने कम पड़ने लगी जगह…देखें वीडियो..


रायपुर (खटपट न्यूज)। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और दुर्ग कोरोना से हालात काफी बिगड़ते जा रहे हैं। मौतों के आंकड़े और बढ़ता संक्रमण न सिर्फ डराने वाले हैं बल्कि यह बताने के लिए काफी हैं कि अब भी नहीं संभले तो हालात और भी खराब हो जाएंगे। खुद के साथ-साथ दूसरे की रक्षा के लिए तमाम ऐहतियात बरतना बहुत जरूरी हो चला है क्योंकि कोरोना सिर पर मौत बनकर नाच रहा है। रायपुर में मंगलवार को 2 हजार 821 नए कोरोना केस के साथ 26 लोगों ने जान गंवाई है। हालात ये हैं कि शवों को जलाने के लिए मुक्तिधाम में जगह कम पड़ गए हैं। जिले के सभी कोविड अस्पताल के बेड फुल हो गए हैं, ऐसे में लोग प्राइवेट का सहारा ले रहे। निजी अस्पताल में बेड जरूर मिल रहा है, लेकिन अच्छी-खासी मोटी रकम चुकानी पड़ रही है। दुर्ग के सरकारी अस्पतालों में भी शवों के रखने की जगह नहीं है तो अंतिम संस्कार के लिए भी जगह कम पड़ने लगी है।

0 दो गज की जमीन नसीब नहीं
रायपुर के देवेंद्र नगर स्थित मुक्तिधाम में शव जलाने के लिए जो शेड बनाए गए थे, वो भर चुके थे. शेड के भर जाने की वजह से सीढ़ियों के पास ही शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा था। इस तरह कोरोना से मरने वाले लोगों को दो गज की जमीन भी नसीब नहीं हो रही है। चूकिं शवों को कोरोना गाइडलाइन के तहत जलाना है, इसलिए दूसरे स्थानों पर जलाने पर मनाही है। केयर टेकर बलराम सोनवानी बताते हैं कि देवेंद्र मुक्तिधाम में रोजाना 4 से 5 के शव आ रहे हैं। समस्याओं को देखते हुए आज शव जला रहे हैं, तो कल उसे उठाने के लिए सामने वाले व्यक्ति से निवेदन करना पड़ता है जिससे अन्य शवों को जलाया जा सके। चूंकि मुक्तिधाम में जगह की कमी है इसलिए सड़क पर शवों को जलाना पड़ रहा है। महादेव घाट स्थित मुक्तिधाम में तो जगह के अभाव में शेड के बाजू में सड़क पर ही शव को जलाया जा रहा था। केयर टेकर धनीराम मेश्राम नेे बताया कि प्रतिदिन 6 से 7 शव आ रहे हैं। कभी-कभी संख्या इससे और ज्यादा बढ़ जाती है। जगह की कमी है, इसलिए नीचे शव जलाना पड़ रहा है। हमने एक दो बार जोन कमिश्नर से निवेदन भी किया है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा है, मुक्तिधाम में व्यवस्था ढंग से नहीं है।
0 व्यवस्था काफी लचर
राजधानी प्रदेश का हॉटस्पॉट बना हुआ है। रायपुर में कोरोना से जंग लड़ने व्यवस्था काफी लचर है। सक्रिय मरीजों की तुलना में एक तिहाई बेड नहीं है। आईसीयू में भी मरीज भटकने को मजबूर हैं। रायपुर जिले में पांच कोविड अस्पताल हैं जहां 924 बेड हैं जिसमें जनरल बेड 530, ऑक्सीजन सपोर्ट बेड 370 है. वहीं अभी रायपुर में 13 हजार 107 एक्टिव केस हैं। रायपुर में माना कोविड हॉस्पिटल, लालपुर कोविड हॉस्पिटल, आयुर्वेदिक कोविड हॉस्पिटल, फुंडहर कोविड सेंटर, धरसीवा एवं तिल्दा कोविड हॉस्पिटल है. ये सभी अस्पताल फुल हैं। अब हालात ये हो गए हैं कि इलाज नहीं मिलने से मरीजों की मौत हो रही है, इस बात को नाकारा नहीं जा सकता है। गंभीर स्थिति होने के बावजूद अस्पताल में बेड नहीं मिल रहा है। ऐसी स्थिति निजी अस्पताल में अच्छी खासी रकम देकर इलाज कराना पड़ता है या फिर मौत का इंतजार रहता है.
0 राजधानी में 10 दिन के लिए लॉकडाउन
बता दें कि कोरोना के बढ़ते स्थिति को देखते हुए रायपुर में 10 दिन के लिए पूर्ण लॉकडाउन लगा दिया गया है। 9 अप्रैल शाम 6 बजे से 19 अप्रैल की सुबह 6 बजे तक रायपुर टोटल लॉकडाउन रहेगा। जिले की सभी सीमाएं सील रहेंगी। इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर बाकी सब कुछ बंद रहेगा। इस ऐलान के बाद लोग सड़कों पर उतरकर दुकानों में टूट पड़े और सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां भी जमकर उड़ने लगी है।

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