Sunday, March 22, 2026
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अगर जबरदस्ती मन्दिर तोड़ा गया तो हम आत्मदाह कर लेंगे, दीपका परियोजना विस्तार से प्रभावित जायसवाल दंपत्ति मानवाधिकार आयोग की शरण में…जानें क्या है मामला

कोरबा-दीपका (खटपट न्यूज)। एसईसीएल की दीपका परियोजना विस्तार के लिए रोजगार, मुआवजा और बसाहट दिए बगैर मलगांव के भू-विस्थापितों को गांव से हटाने और आस्था के केन्द्र मंदिर को जबरिया तोड़ने के लिए दबाव से आजिज आ चुके जायसवाल दम्पत्ति ने आत्मदाह की बात कही है। इन्होंने कहा है कि वो उसी मन्दिर स्थल में आत्मदाह कर लेंगे। इससे पहले भी मन्दिर को तोड़ने के खिलाफ कई बार पत्राचार किया जा चुका है। 10 फरवरी को एडीएम कटघोरा द्वारा धमकी भरे लहजे में मन्दिर को तोड़ने की बात सामने आने के बाद जायसवाल दम्पत्ति ने न्याय की गुहार लगाते हुए राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष को न्याय दिलाने ई-मेल के जरिए पत्र प्रेषित किया। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सहित अन्य अधिकारियों को भी प्रतिलिपी भेजकर अपनी व्यथा व्यक्त किया है।

कोरबा जिले के विकासखंड पाली अंतर्गत आने वाले एसईसीएल प्रभावित ग्राम मलगांव स्थित पुस्तैनी मन्दिर को तोड़ने के लिए दबाव बनाने के सबन्ध में शिकायत कर जायसवाल दंपत्ति ने बताया कि एसईसीएल ने अभी तक बसाहट के लिए स्थान और प्लाट आबंटित नहीं किया है। विरोध होने के बावजूद पिछले दिनों गांव के 100 साल पुराने तालाब को रात के अंधेरे में अधिकारियों की उपस्थिति में जबरदस्ती तोड़ दिया गया और अब वहाँ पर लगभग 50 वर्ष पुराने मन्दिर को भी जबरदस्ती तोड़ने के लिए दबाव बनाया जा रहा है जो कि हमारे आस्थापर चोट पहुंचाने का मामला है।
खुशाल जायसवाल (श्यामू) का आरोप है कि 10 फरवरी 2021 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कटघोरा के द्वारा अपने कार्यालय में राजस्व व एसईसीएल के अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में मुझे सख्त निर्देश देते हुए मंदिर को तोड़ने के लिए कहा गया और हिदायत दी गयी कि अगर मैं नही मानता हूं तो कार्यवाही किया जाएगा।

जायसवाल दंपत्ति ने मांग की है कि मुआवजा और बसाहट की समस्याओं का समाधान हो जाने के बाद मंदिर को बसाहट स्थल पर स्थापित कर दिया जाए परंतु खदान प्रबंन्धन अपने उत्पादन बाधित होने का हवाला देकर जोर जबरदस्ती से मन्दिर ही नहीं पूरे गांव को भी खाली करवा देना चाहता है। एसईसीएल के इस रवैय्ये से हमारा पूरा परिवार मानसिक रूप से तनावग्रस्त है और किसी भी अप्रिय घटना को कर गुजरने के लिए मजबूर है। पीड़ित खुशाल जायसवाल (श्यामू), पत्नी प्रीति जायसवाल ने उक्त शिकायत की प्रतिलिपि ई-मेल के जरिए ही प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, अध्यक्ष राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग नई दिल्ली, चेयरमेन कोल इंडिया, कलेक्टर, एसडीएम कटघोरा, पुलिस अधीक्षक, थाना प्रभारी दीपका सहित समस्त राजनैतिक व सामाजिक संगठन को भी प्रेषित की है।
0 किसानों की दुर्दशा पर भी कराया ध्यानाकर्षण
अपनी शिकायत में खुशाल जायसवाल ने कहा है कि एसईसीएल द्वारा अपनी परियोजनाओं के लिए किसानों की जमीन का अधिग्रहण कर लेने के बाद 15-20 सालों तक रोजगार, मुआवजा और बसाहट के लिए विस्थापित परिवारों को घुमाया जाता है। एक तरह से जमीन की जमाखोरी किया जाता है। अधिग्रहण की प्रारम्भिक प्रकाशन के बाद किसान अपनी जमीन में ही निर्वासित जीवन जीने के लिए बाध्य हो जाते हैं। घर मे संकट आने पर भी आर्थिक बदहाली से, बीमारी से मौत हो जाने जैसी घटना होती है ।
0 एसईसीएल के सभी क्षेत्रों में रोजगार,मुआवजा और बसाहट की कई लम्बित प्रकरणों का निपटारा 35 साल बाद भी नहीं किया गया है और भुविस्थापित परिवार दर-दर की ठोकर खाने के लिए मजबूर हैं ।

0 जिस मंदिर पर हमें और ग्राम वासियों को अटूट आस्था है, उसको पहले भी खण्डित किया गया है और अब प्रतिमाओं को बार-बार यहां से वहां रखने के लिए मजबूर किया जा रहा है। एसईसीएल प्रबन्धन भूविस्थापितो को लगातार उपेक्षित करती रही है। अलग-अलग मापदंडों पर पुनर्वास नियमों को लागू कर किसानों को उनके वाजिब अधिकार से वंचित किया जाता है। दीपका परियोजना में भी ऐसे सैकड़ों मामले लंबित हैं। इन्ही सब कारणों और अंदेशों से भुविस्थापित परिवार किसी भी आश्वासन को मानने के लिए तैयार नहीं है।

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